हाथ तो मिले पर अभी दिल नहीं मिला ! The hand of the heart has not met yet!




साहिबाबाद, ( संजय त्रिपाठी ) साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशी अमरपाल शर्मा का चुनाव दो पाटो के बीच फंसा नजर आ रहा है । कांग्रेस और सपा के हाथ तो मिल गए हैं, लेकिन दोनो पार्टी के कार्यकर्ताओं के अभी दिल नहीं मिले हैं । सिर्फ पार्टी को दिखाने के मकसद से दोनों पार्टी के कार्यकर्ता अमरपाल शर्मा के साथ लगे हुए दिख रहे हैं । हालांकि गठबंधन प्रत्याशी शर्मा भी अपने पुराने साथियों पर ही ज्यादा विश्वास जता रहे हैं । 
मतदान के दिन नजदीक आने के साथ ही सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अमरपाल के लिए कार्य करने की योजना तो बना रहे हैं, लेकिन यह योजना हकीकत में अभी कहीं भी नजर नहीं आ रही है । पांच साल विधायक रहने के साथ ही कुछ क्षेत्रों के उपेक्षा करने के कारण वहां के मतदाता पहले से ही अमरपाल से खफा हैं । कुछ क्षेत्र के बुजुर्गो का कहना है कि पिछली बार जब अमरपाल बसपा के टिकट से चुनाव लड़े थे तब उन्होंने कालोनी में कई सुविधाएं देने का वादा किया था, लेकिन चुनाव जितने के बाद एक बार भी इधर मुड़ कर नहीं देखें । इनका कहना है कि दो पार्टियों के गठबंधन से ही चुनाव नहीं जीत जायेंगे । वोट तो हम लोगों को देना है । आम जनता के साथ ही कांग्रेस के स्थानीय नेता अभी उन्हें पचा नहीं पा रहे हैं । पता चला है कि कांग्रेस महानगर अध्यक्ष नरेन्द्र भारद्वाज भी कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे थे । टिकट कटने से वह नराज भी थे । अमरपाल के कांग्रेस ज्वाइन करने के साथ ही उन्हें एहसास हो गया था कि अब उन्हें टिकट नहीं मिल पायेगा ।  लेकिन टिकट कटने के साथ ही अमरपाल शर्मा के टिकट के घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद थी कि नोमिनेशन के दिन अमरपाल शर्मा जरूर उन्हें अपने साथ नोमिनेशन के लिए ले जायेंगे, पर ऐसा हुआ नहीं । दूसरे कई दिनों तक उनसे संपर्क भी नहीं किया गया । वह भी खफा ही बताए जा रहे हैं । ऐसी जानकारी मिल रही है कि अमरपाल शर्मा गुट के तरफ से प्रदेश अध्यक्ष को लिखित शिकायत कर कहा गया है कि कांग्रेस प्रत्याशी को लड़ाने में महानगर अध्यक्ष के तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है । कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को धमंण्डी बता रहे हैं । उनका कहना है कि पार्टी के प्रत्याशी तो हैं, लेकिन उन्हें किसी से कोई सहयोग ही नहीं चाहिए, अब हम लोग किस लालच में उनके पीछे - पीछे डोले । साथ ही हर वार्ड के अध्यक्ष से नगर अध्यक्ष का तालमेल होता है जब तक नगर अध्यक्ष का साथ नहीं होगा, तब तक कांग्रेस प्रत्याशी का चुनाव रफ्तार नहीं पकड़ पायेगा । 
उधर सपा कार्यकर्ता अपने को ठगा महसुस कर रहे हैं । अंत समय तक सपा को उम्मीद थी कि साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से उनका ही प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा । सपा ने अंतिम समय तक अपने द्वारा घोषित उम्मीदवार विरेन्द्र यादव का नाम भी चला रहा था, लेकिन अंतिम समय में गठबंधन के बाद कांग्रेस को यह सीट मिलने से अभी सपा कार्यकर्ता उबर नहीं पाये हैं । कुछ नेता जरूर अमरपाल शर्मा के साथ घुम भी रहे हैं, कुछ बैठक, मीटिग की योजना भी बना रहे हैं, लेकिन अभी भी उनके दिल मिले नहीं दिखाई दे रहे हैं । कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि हमारी स्थिति ‘ ताड़ से गिरे खजूर पर अटके ’ जैसी हो गई है । हर कालोनी व वार्ड में अमर पाल शर्मा के पुराने कार्यकर्ता ही संपर्क बनाते नजर आ रहे हैं । जब वहां के लोग उस क्षेत्र के पुराने कांग्रेस के नेताओं से पुछते है कि तुम्हारे पार्टी से चुनाव लड़ रहा है और तुम कहीं दिखाई ही नहीं दे रहे हो तब वह नेता अपनी झेप मिटाने के लिए एक ही बात कहता है कि आप लोगों ने हमारे इस प्रत्याशी को पांच साल तो देख लिया है अब कांग्रेस में आकर यह कौन सा झंण्डा गांड़ देगें । अभी भी अमरपाल शर्मा के लिए समय है चुनाव जोरदार तरीके से लड़ना है तो दोनों पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं से संपर्क बना कर उन्हें साथ लेकर चले , तभी भाजपा जैसे पार्टी का सामना इस क्षेत्र से कर पायेंगे । पिछले चुनाव के जीत के गफलत में न पड़े । 




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