यूपी में BJP की सबसे बड़ी जीत के ये हैं 10 कारण, CM बनने की दौड़ में 6 नाम 6 names in race to become CM



लखनऊ, ( न्यूज नेटवर्क )  यूपी में 403 सीटों में से 312 सीटों पर बीजेपी जीत हासिल कर चुकी है। सपा 47 और कांग्रेस ने 7 तो बसपा ने 19 सीटें जीती हैं। वाराणसी की आठों सीटें बीजेपी के खाते में आईं, जहां पीएम मोदी ने 3 द‍िन रुककर चुनाव प्रचार क‍िया था। ये बताता है क‍ि यूपी में मोदी लहर कायम है। इसके पहले भी ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का अनुमान लगाया गया था। क्लियर मेजॉरिटी मिलने के बाद अब सीएम के लिए नाम की चर्चा शुरू हो गई है। छह नाम चर्चा में हैं। ये हैं- राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा, डॉ. दिनेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्या, योगी आदित्यनाथ और स्वतंत्रदेव सिंह।  सीनियर जर्नलिस्ट श्रीधर अग्निहोत्री और योगेश श्रीवास्तव बता रहे हैं बीजेपी कैसे और क्यों आगे निकली...
1) मोदी की रैलियां
- बीजेपी की तरफ से कोई सीएम कैंडिडेट नहीं था। वह मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ रही थी। मोदी ने यूपी में 20 से ज्यादा रैलियां कीं। प्रचार पूरी तरह से मोदी पर फोकस्ड रहा। पार्टी ने उनकी विकास की इमेज का पूरा फायदा उठाया। उनके भाषणों ने जनता को बीजेपी के प्रति आकर्षित करने का काम किया।
2) नोटबंदी फेवर में रही
- इसके अलावा, नोटबंदी का भी बीजेपी को फायदा मिलता दिख रहा है। सपा-बसपा-कांग्रेस ने इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की लेकिन नोटबंदी का मुद्दा बीजेपी के फेवर में गया। जानकारों का ये भी मानना है कि विधानसभा चुनाव में पहली बार पार्टी ने युवाओं पर सबसे ज्यादा दांव लगाया, जिसका फायदा उसे मिला।
3) अोडिशा-महाराष्ट्र के नतीजों से माहौल बना
- वहीं, ओडिशा पंचायत चुनाव में बीजेपी को पहली बार मिली जीत और महाराष्ट्र के शहरी निकायों के चुनावों में कामयाबी का असर भी यूपी में पड़ता दिख रहा है।
4) कास्ट फैक्टर
- बीजेपी ने मुस्ल‍िमों को लुभाने के लिए सपा-कांग्रेस अलायंस या बसपा जैसी स्ट्रैटजी नहीं अपनाई। उसने शहरी इलाकों पर फोकस किया। मोदी के विकास के एजेंडे को भी भुनाया।

5) युवाओं ने भरोसा जताया
- यूपी में युवा वोटर बढ़े हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखें तो यूपी में 24.53 लाख वोटर हैं। इसे देखते हुए बीजेपी ने 60% युवा कैंडिडेट उतारे। 
- 42 साल के अखिलेश के बजाय 65 पार मोदी पर युवाओं ने खूब भरोसा जताया। वहीं, बीजेपी का धर्म के आधार पर लैपटॉप और कन्या विद्याधन न दिए जाने का वादा भी काम कर गया।
6) अवैध कत्लखानों का मुद्दा उठाया
- वेस्ट यूपी में लगभग 2 दर्जन से ज्यादा अवैध कत्लखाने चल रहे हैं। इसके अलावा कई छोटे कत्लखाने भी हैं। 
- 2015 में दादरी कांड के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को सबसे ज्यादा हवा दी थी। गोकशी रोकने के लिए सहयोगी आरएसएस, बजरंग दल जैसे दलों ने बकायदा मुहि‍म चलाई। इसका फायदा भी बीजेपी को मिला। हिंदू वोटर्स ने अवैध कत्लखानों को रोकने के बीजेपी के वादे पर भरोसा किया।
7) मोदी की रैलियों ने बदला समीकरण
- मोदी ने 22 रैलियां, 22 जिलों में की और बनारस में 2 रोड शो किए। मोदी ने जहां-जहां रैलियां कीं, वहां बीजेपी को फायदा मिला। 
- इसका असर ऐसे देखें कि 2012 में देवरिया में बीजेपी का 1 कैंडिडेट जीता था, जबकि 2017 में देवरिया में 7 सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिली। 
- इसी तरह लखनऊ की 9 सीट में से सिर्फ 1 सीट पर 2012 में बीजेपी को मिली थी, जबकि इस बार 8 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है।
8) फ्लोटिंग वोट पर दिया ध्यान
- बीजेपी ने फ्लोटिंग वोट्स पर भी फोकस किया। यूपी में फ्लोटिंग वोट 3% से 5% होता है, जो माहौल के हिसाब से वोट करता है। 
- फ्लोटिंग वोट में महिला वोटर्स ज्यादा होती है। इस बार महिला वोटर्स की संख्या भी ज्यादा रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, महिला वोटर यूपी में 60.38% हैं। 
- फर्स्ट फेज के दौरान विधानपरिषद के आए रिजल्ट ने भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया। मोदी ने भी विधानपरिषद के रिजल्ट का जिक्र अपने भाषण में किया था। 
- चुनाव के दौरान ही उड़ीसा पंचायत चुनाव में पहली बार मिली बीजेपी को जीत और महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव की सफलता का असर यूपी में भी पड़ा।
9)  जिताऊ कैंडिडेट्स पर जताया भरोसा
- बीजेपी ने जिताऊ कैंडिडेट्स पर भरोसा जताया। सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद से आए करीब 62 कैंडिडेट्स को टिकट दिया। इसका उदाहरण ये है कि इलाहाबाद से बसपा के नंद गोपाल नंदी सुबह बीजेपी में शामिल हुए और शाम को उन्हें टिकट दे दिया गया। 
- इसी तरह सपा से अरिदमन सिंह बीजेपी में शामिल हुए तो उनकी पत्नी रानी पक्षालिका सिंह को टिकट दे दिया गया। बाहरी कैंडिडेट्स में लगभग सभी जीतकर आए हैं।
10)  ध्रुवीकरण कराने में रहे सफल
- फर्स्ट और सेकंड फेज में बीजेपी ने खुद ध्रुवीकरण की कोशिश नहीं की, जबकि यहां पहले से ही कैराना और मुजफ्फरनगर का दंश सुलग रहा था। इससे यहां ध्रुवीकरण हुआ।
- वहीं, चौथे फेज के बाद मोदी ने बिजली और कब्रिस्तान-श्मशान का मुद्दा उठाया। 2014 में बीजेपी को 328 सीटों पर बढ़त हासिल हुई थी, जो बीजेपी ने अभी तक बरकरार रखी।
11) महिला वोटर्स ने भी निभाई बड़ी भूमिका
- बीजेपी के लिए महिला वोटर्स ने भी बड़ी भूमिका निभाई। आंकड़े देखें तो महिला वोटर यूपी में 60.38% हैं। बीजेपी ने 45 महिला कैंडिडेट्स उतारे, जबकि इसके बाद सपा ने 25 और कांग्रेस ने 6 कैंडिडेट्स को टिकट दिए। 
- बसपा ने सिर्फ 21 सीट पर महिला कैंडिडेट उतारे। इसके अलावा स्वाति सिंह फैक्टर भी काम आया। जिस तरह से स्वाति सिंह के पति दयाशंकर सिंह ने मायावती पर अभद्र कमेंट किया था, उसी के जवाब में बसपाइयों के बड़े नेताओं ने दयाशंकर सिंह की पत्नी और उसकी बेटी पर भी अभद्र कमेंट किया और उसे बीजेपी ने मुद्दा बना लिया। 
- इस फैक्टर ने जहां महिलाओं को बीजेपी से जोड़ा, वहीं सवर्ण वोटों को बीएसपी और सपा-कांग्रेस अलायंस से दूर किया। 2007 में बहुमत में आने के बाद भी उतना वोट सवर्ण का नहीं मिला था, जितना 2012 में सत्ता में नहीं आने के बाद भी मिला। 2007 में बसपा को 16% ब्राह्मण, 12% राजपूत, 14% वैश्य, 15% अदर अपर कास्ट का वोट मिला था। वहीं, 2012 में 19% ब्राह्मण, 14% राजपूत, 15% वैश्य और 17% अदर अपर कास्ट मिला था।
12) किसानों पर किया फोकस
- बीजेपी ने अपने मैन‍िफेस्टो में किसानों की कर्ज माफी को जगह दी। हालांकि, राहुल ने भी किसानों को लुभाने के लिए 3 दर्जन खाट सभाएं कीं, 2229 किमी चले और 20 से ज्यादा रोड शो किए, लेकिन वो ये क्लियर नहीं कर पाए कि किसानों को क्या देंगे? 
- वहीं, बीजेपी ने यूपी के लगभग 70% लघु और सीमांत किसानों को भरोसा दिलाया कि कर्ज माफी वही कर सकते हैं। ये सही भी है क‍ि केंद्र सरकार की मदद के बिना ऐसा संभव भी नहीं होता। अखिलेश ने काउंटर अटैक तो किया, लेकिन किसान का भरोसा बीजेपी पर ही जाकर टिका।
13) कानून व्यवस्था और करप्शन को मुद्दा बनाया
- यूपी देश में 4732 घटनाओं के साथ नंबर 1 पर है। ऐसे में यूपी की कानून व्यवस्था को भी बीजेपी ने मुद्दा बनाया। यूपी पुलिस के पास डायल 100, 1090 से हाईटेक हुई, लेकिन कार्यशैली में बदलाव नहीं आया। इन दोनों योजनाओं को बीजेपी ने बेहतर करने का वादा किया। 
- सपा सरकार में हुई घटनाओं पर बीजेपी ने लगातार सवाल उठाए। इसमें सीओ जियाउल हत्याकांड, बदायूं कांड, पत्रकार जोगिंदर सिंह हत्याकांड जैसी बड़ी घटनाएं शामिल रहीं। 
- यही वजह है क‍ि चुनाव के बीच गायत्री रेप केस मामले में फरार हुए, लेकिन यूपी की हाईटेक पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई। ये मैसेज भी जनता के बीच गया। 
- करप्शन को मुद्दा बनाया। यादव सिंह और लोकसेवा आयोग के मुद्दे पर अखिलेश को घेरा गया। जनता के बीच ये मैसेज देने में कामयाब रहे कि सपा में सिर्फ यादवों की ही सुनवाई होगी।
14) अन्य अतिपिछड़ी जातियों पर बीजेपी का फोकस
- बीजेपी शुरू से ही यादवों के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों पर फोकस किए हुए थी। यूपी में 40% अन्य पिछड़ी जातियां हैं, जबकि इनमें से 9% यादव हैं। 
- अन्य जातियों पर बीजेपी ने फोकस करते हुए केंद्र में मोदी ने अपने कैबिनेट विस्तार में कुर्मी नेता अनुप्रिया पटेल को जगह दी। माना जा रहा है क‍ि इसका नुकसान भी पा को हुआ। 
- भितरघात की वजह से सपा को यादवों के 9% वोट में से भी 1 से 2% कम वोट मिले। बीजेपी को इसका फायदा मिला।











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