जनता की आशाओं पर दिल्ली सरकार के बजट ने फेरा पानी





प्राइवेट और सरकारी स्कूल की दोहरी शिक्षा नीति ख़त्म करने और समान शिक्षा नीति लागू करने की केवाईएस ने उठाई मांग

नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) दिल्ली सरकार की जनता की आशाओं की एक बार फिर अवहेलना करने पर आलोचना करता है| 3 साल सत्ता में रहने के बावजूद आप सरकार ने अभी तक नए कॉलेज खोलने के अपने चुनावी वादे को पूरा नहीं किया है| ज्ञात हो कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों को 12वीं के बाद, सरकारी विश्वविद्यालयों में प्राइवेट स्कूल से पढ़कर आये छात्रों से एंट्रेंस में पिछड़ जाने के कारण या तो पढ़ाई छोड़नी पड़ती है या उन्हें कॉरेस्पोंडेंस कोर्सों में एडमिशन लेना पड़ता है| दिल्ली सरकार द्वारा ही चालित अम्बेडकर विश्वविद्यालय की फीस कम कर उसे आम छात्रों के लिए सुलभ बनाने के लिए कोई भी रकम नहीं आवंटित की गयी है और न ही उसमें सीटों की कोई बढ़ोत्तरी की गयी है| दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) छात्रों की भी लम्बे-समय की मांग- दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 28 कालेजों में इवनिंग शिफ्ट चलाने- पर भी कोई कदम नहीं लिया गया है|

केवाईएस आप सरकार द्वारा बजट में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के लिए रकम आवंटन का स्वागत करता है| परन्तु पिछले साल की दिल्ली सरकार की बजट घोषणा के बावजूद आज भी सरकारी स्कूलों का हालत डरावनी है क्योंकि कई स्कूलों में तो शौचालय, बेंच, हर विषय के शिक्षक तक नहीं हैं| आप सरकार द्वारा इस साल 5 ‘उत्कृष्ट स्कूलों’ का निर्माण करने से अन्य सभी सरकारी स्कूलों की हालत अच्छी नहीं हो जाती| शिक्षा नीति में बुनियादी बदलाव कर, गैर-बराबरी को खत्म करने की जगह आप सरकार सिर्फ और कक्षाएं बनाने पर खुद की पीठ थपथपा रही है| ज्ञात हो कि क्रांतिकारी युवा संगठन(केवाईएस) लम्बे समय से सरकारी और प्राइवेट स्कूल की दोहरी शिक्षा नीति ख़त्म करने की मांग कर रहा है| छात्र आन्दोलन और शिक्षाविदों भी गैर-बराबरी को खत्म करने के लिए समान स्कूली व्यवस्था की मांग करते रहे हैं| | परन्तु मनीष सिसोदिया स्वयं ही अपने मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने की हिम्मत नहीं रखते हैं, क्योंकि सरकारी स्कूलों की स्थिति अभी तक ख़राब है| कुछ स्कूलों में क्लासरूम बढ़ाने से सरकारी और प्राइवेट स्कूल के बीच की गैरबराबरी नहीं ख़त्म होगी|  

                                   




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