जनता के पैसे से बिजनेस क्लास में सफर और जनता की ही पिटाई By नीरज कुमार दुबे Traveling in business class with public money and beating the public



जनता का प्रतिनिधि यदि गुंडागर्दी पर उतर आये और अपने को कानून से ऊपर समझने लगे यही नहीं अपने खिलाफ कार्रवाई की चुनौती भी देने लगे तो यकीनन इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण दिन ही कहा जायेगा। चुनावों के समय गरीब जनता के साथ जमीन पर बैठकर उनका हाल जानने वाले यदि सत्ता मिलते ही बिजनेस क्लास से नीचे की श्रेणी में सफर करने को अपना अपमान मानने लगें तो इससे असल चरित्र सामने आ जाता है। यदि बिजनेस क्लास से नीचे की श्रेणी में सफर करना अपमानजनक है तो सांसद महोदय को पता होना चाहिए कि विमान सेवा का उपयोग करने वाले अधिकांश यात्री इकोनॉमी क्लास में ही यात्रा करते हैं। और यह बिजनेस क्लास में सफर की जिद क्यों? जनता के पैसे से बिजनेस क्लास में यात्रा करने वालों को अपनी जेब से खर्च कर इस श्रेणी में यात्रा करनी चाहिए।

शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने एअर इंडिया विमान में मनपसंद सीट नहीं मिलने पर विमान सेवा के बुजुर्ग कर्मचारी की चप्पल से जिस तरह पिटाई की उससे उम्र का लिहाज तो टूटा ही साथ ही सत्ता की अकड़ भी सामने आई। सांसदों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं इसलिए दिल्ली पुलिस तुरंत मामला दर्ज नहीं कर पाई लेकिन विवाद बढ़ने पर उसने मामला दर्ज किया। माना जा रहा है कि मामले में पूछताछ के लिए सांसद महोदय को बुलाया जा सकता है। वैसे पूछताछ के लिए पुलिस को ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी क्योंकि सांसद ने कैमरे के सामने खुद ही स्वीकार किया, ''मैंने उस कर्मचारी को 25 बार सैंडिलों से मारा और मैं उसको सीढ़ियों से नीचे फेंकने वाला था कि महिला कर्मचारियों ने कहा कि वह बाल बच्चे वाला है इसलिए उसे छोड़ दीजिए तो मैंने छोड़ दिया।'' इस कुबूलनामे के बावजूद सांसद महोदय को अपनी गलती नजर नहीं आ रही है और वह कह रहे हैं कि यदि एयर इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और उसके कर्मचारी आर. सुकुमार उन्हें बदनाम करने के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो वह उनके विरूद्ध मानहानि का मामला दर्ज करायेंगे।

हैरत की बात है कि 'सामना' के संपादकीय में नैतिकता और शुचिता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली शिवसेना ने अपने सांसद की इस हरकत पर मात्र स्पष्टीकरण मांग कर चुप्पी साध ली है। जबकि होना यह चाहिए था कि सांसद को पार्टी से कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाता लेकिन आखिरकार 'हाथी के दांत खाने के कुछ और और दिखाने के कुछ और होते हैं'। यदि यही हरकत किसी और पार्टी के सांसद ने की होती तो शिवसेना ने नैतिकता का लंबा चौड़ा पाठ पढ़ा दिया होता। इस मामले में पश्चाताप और माफी मांगने की बात तो दूर गायकवाड़ कह रहे हैं, ‘‘मुझे कोई अफसोस नहीं है। अधिकारी को माफी मांगनी चाहिए.. उल्टे एयर इंडिया के सीएमडी को मुझसे माफी मांगनी चाहिए। मैं उनका उपभोक्ता हूं।’’ वह तो चेतावनी भी दे रहे हैं कि यदि उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया तो ''मेरी पार्टी और उद्धव साहेब इसे देख लेंगे।''

इस मामले में फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने उक्त सांसद को विमान यात्रा करने से रोकने के लिए उन पर प्रतिबंध लगा कर सही फैसला किया है। इस फैसले के कारण ही वह पुणे जाने के लिए विमान यात्रा का टिकट होने के बावजूद रेल यात्रा करने के लिए मजबूर हुए। अब एअर इंडिया ही नहीं बल्कि फेडरेशन में शामिल किसी भी विमानन कंपनी की सेवा का उपयोग गायकवाड़ नहीं कर पाएंगे। फेडरेशन के इस कदम से विमान यात्रा के दौरान हेकड़ी दिखाने वाले वीआईपी लोगों को संभवतः कुछ सबक मिले। एअर इंडिया सहित अन्य एयरलाइनों ने ऐसे लोगों की सूची बनाने का भी निर्णय लिया है जिन पर विमान यात्रा करने पर प्रतिबंध होता है। ऐसी सूची वाकई वक्त की जरूरत है क्योंकि इधर पिछले कुछ समय से विमान यात्राओं के दौरान विमान कर्मचारियों के साथ अभद्रता और विमान में नाहक ही झगड़ा आदि कर दूसरों का जीवन खतरे में डालने की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि एअरलाइनों का यह फैसला यदि कानून सम्मत नहीं हुआ तो सरकार इस पर कार्रवाई भी कर सकने का अधिकार रखती है।

वैसे इस मामले का संसद की आचार समिति को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। ऐसे अनेकों वाकये हुए हैं जब नैतिकता के मुद्दे पर संसद ने अपने सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की है। गायकवाड़ कह रहे हैं कि उन्होंने अपने कार्य से संसद को गौरवान्वित किया है ऐसे में सदन को कम से कम उनके इस दावे की जांच ही कर लेनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा है कि वह मामले पर स्वत: संज्ञान नहीं ले सकतीं और अगर इसे सदन में उनके नोटिस में लाया जाएगा तब ही वह इस पर विचार कर सकती हैं। लोकसभा में 543 सांसद हैं किसी को तो यह मामला नोटिस के जरिये उठाना ही चाहिए।

बहरहाल, यदि इस मामले में पीड़ित को न्याय नहीं मिला तो इससे शांति पसंद नागरिकों को निराशा ही होगी। इस मामले में पूरी तरह गायकवाड़ की ही गलती नजर आती है क्योंकि उन्होंने सिर्फ इसीलिए एयर इंडिया के एक कर्मचारी को चप्पलों से बुरी तरह पीटा क्योंकि बिजनेस क्लास का टिकट होने के बावजूद उन्हें इकॉनामी क्लास में सफर करना पड़ा था। हालांकि पुणे से दिल्ली की उस उड़ान में सवार होने की जिद उन्होंने खुद ही की थी। यही नहीं दिल्ली आने के लिए पुणे में विमान में सवार होने के दौरान भी उड़ान में बिजनेस क्लास सीटें नहीं होने को लेकर गायकवाड़ की एयर इंडिया के अधिकारियों के साथ कहासुनी हुई थी। राष्ट्रीय विमानन सेवा ने सांसद के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज करायी हैं। पहली प्राथमिकी हमले से संबंधित है जबकि दूसरी विमान को रोके रखने को लेकर लेकिन देखने वाली बात यह है कि पुलिस कब हरकत में आती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह सांसद महोदय वर्ष 2014 में महाराष्ट्र सदन में रोटियों की गुणवत्ता को लेकर रमजान के दौरान एक मुस्लिम कर्मचारी के मुंह में जबरन रोटी डालने की कथित कोशिश को लेकर भी विवादों में आए थे।

 नीरज कुमार दुबे




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