मजदूरों पर लगाये गए झूठे आरोपों को तुरंत वापस लेने की मांग की Demanded immediate withdrawal of false charges imposed on laborers



मारूति मजदूरों को सज़ा दिए जाने के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ केवाईएस

नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता  )  आज क्रांतिकारी युवा संगठन(केवाईएस) के सदस्य, अन्य संगठनों के साथ जिनमे घरेलू कामगार यूनियन (जी.के.यू) और मजदूर एकता केंद्र (एम.ई.के) शामिल थे, मारूति मजदूरों को सज़ा दिए जाने में हरियाणा राज्य प्रशासन, राज्य पुलिस और न्यायपालिका के मारूति सुजुकी के साथ गठजोड़ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए| पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुए लोगों को हरियाणा भवन जाने से रोका और उन्हें जबरदस्ती बसों में भरकर जंतर मंतर पर छोड़ दिया| ज्ञात हो 117 मजदूरों जिनको कथित तौर पर दंगे में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था उन्हें 4 साल बाद बरी कर दिया गया है| और मारुती आन्दोलन में संघर्ष को नेतृत्व दे रहे सभी आन्दोलनकारियों को सुनियोजित ढंग से मृत मारूति कर्मचारी की हत्या का आरोपी घोषित किया गया है| गुडगाँव जिला न्यायलय ने 13 मजदूरों को हत्या का आरोपी और 18 अन्य को दंगे सहित अन्य आरोपों में दोषी घोषित किया है| ज्ञात हो मारूति सुजुकी फैक्ट्री में 2012 में मजदूरों ने फैक्ट्री में हो रहे शोषण और खराब काम की स्थितियों के खिलाफ संघर्ष शुरू किया था|

मारूति फैक्ट्री में कंपनी द्वारा मजदूरों के शोषण का बेहद खराब माहौल तैयार किया हुआ था| फैक्ट्री के मैनेजमेंट द्वारा भारी संख्या में कर्मचारियों को ‘ठेके’ पर रखा हुआ था, जिससे इनसे न्यूनतम मजदूरी से भी कम दाम पर ज्यादा-से-ज्यादा काम कराया जा सके| इन अत्याचारों के चलते एम.एस.आई.एल- मानेसर के मजदूरों ने अपना स्वतंत्र यूनियन बनाना चाहा क्योंकि कंपनी द्वारा थोपा गया यूनियन उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए तत्पर नहीं था| अपने यूनियन को श्रम विभाग, हरियाणा राज्य से मान्यता के लिए लम्बे संघर्ष के बाद मजदूरों के मारुती सुजुकी वर्कर्स यूनियन(एम.एस.डब्लू.यु.) को मान्यता मिल गयी परन्तु एम.एस.आई.एल- मानेसर ने इसे मानने से इंकार कर दिया| जिसके जवाब में मजदूरों ने फैक्ट्री मैनेजमेंट के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया, जिसे दबाने के लिए मनगेमेंट ने भारी हिंसा का उपयोग किया और यह तथ्य राज्य व्यवस्था और पुलिस द्वारा पूरी तरह से नजरंदाज किया गया है|

ज्ञात हो देशी-विदेशी कम्पनियाँ श्रम कानूनों को पूरी तरह दरकिनार कर मजदूरों का शोषण कर रही हैं, जिसमे राज्य सरकारें उनका साथ दे रही हैं| इस मामले पर जिला न्यान्यालय द्वारा लिया गया मौजूदा फैसला पूंजीपतियों और राज्य व्यवस्था के गठजोड़ का गन्दा चेहरा तो दिखता ही है बल्कि मजदूर-विरोधी चरित्र का भी पर्दाफाश करता है| यह बेहद दुखद है कि राज्य व्यवस्था ने मजदूरों पर लगाये झूठे आरोपों का समर्थन किया है जिससे मजदूर 4 साल तक बेगुनाह होने के बावजूद सज़ा काटने को मजबूर हुए| साथ ही, ऐसे तमाम सबूत जिससे साबित होता है कि फैक्ट्री मैनेजमेंट के रवैये के कारण ही मामले ने हिंसात्मक रूप लिया, होने के बावजूद मैनेजमेंट पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है| 

केवाईएस मांग करता है कि झूठे आरोपों में फ़साये गए मजदूरों पर दायर सभी मुक़दमे तुरंत वापिस लिए जाएँ| और इसके साथ-ही-साथ मारुती फैक्ट्री के मैनेजमेंट पर निष्पक्ष जांच आयोग बैठाकर मामले की जाँच की जाए और असल दोषियों को सजा दी जाए| केवाईएस इसी के साथ सभी जनतांत्रिक और प्रगतिशील जनों, और मजदूर संगठनों को एकजुट होकर पूंजीपतियों-राज्य व्यवस्था के गठजोड़ के खिलाफ संघर्ष में साथ आने का आह्वान करता है|






Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment