- दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया
- 8 मार्च के कार्यक्रम के दौरान 21 सूत्री मांगों वाला महिला मांगपत्रक आंदोलन का किया गया शुरुआत
- छात्राओं, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य प्रतिभागियों ने महिलाओं पर हिंसा और गैरबराबरी के खिलाफ संघर्ष करने का लिया संकल्प
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) आज 8 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय, साऊथ कैंपस में छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा जनतांत्रिक और प्रगतिशील लोगों ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया| अंतर्राष्ट्रीय महिला आन्दोलन के अवसर पर संघर्षशील महिला केंद्र (सी.एस.डब्ल्यू) की पहल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम व पब्लिक मीटिंग का आयोजन किया गया| ज्ञात हो कि सी.एस.डब्ल्यू ने महिला दिवस और महिला आन्दोलन की विरासत का प्रसार करने के लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों जैसे आनंद पर्वत, बलजीत नगर, बुराड़ी, संगम पार्क, बदरपुर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के बीच सप्ताह-भर का अभियान किया| इसी अभियान के तहत पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) की छात्राओं के बीच भी महिला दिवस मनाया गया था| इसमें उनसे अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के खिलाफ संघर्ष को समाज में व्याप्त दमन, शोषण और भेद-भाव के खिलाफ लड़ाई से जोड़ने की बात रखी गयी|
आज आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत स्तर पर झेले गए गैरबराबरी और दमन के अपने अनुभवों को बांटा| दिल्ली विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों के साथ-साथ कई महिलाधिकार कार्यकर्ताओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में गैरबराबरी के विभिन्न रूपों तथा घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, यौन हिंसा, अच्छे और लाभदायक रोजगारों की कमी जैसे समाजिक समस्याओं पर अपनी बातें रखी| सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के शोषण और महिला आंदोलन की ऐतिहासिक सफलताओं से समबन्धित बड़ी संख्या में पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गयी जिसको देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी| इसके साथ-साथ नुक्कड़ नाटक, गीत और समाज में महिलाओं के शोषण और दमन विषय पर भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया|
सी.एस.डब्ल्यू ने प्रगतिशील महिला आन्दोलन की महत्वपूर्ण 21 सूत्री मांगों वाले महिला मांगपत्रक आंदोलन की भी आज शुरुआत की| मांगपत्र को कार्यक्रम के दौरान छात्राओं की भारी सहमति देखने को मिली और पहले ही दिन करीब 500 हस्ताक्षर जमा हो चुके हैं| महत्वपूर्ण मांगों में- महिलाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभी के लिए रोजगार, समान काम का समान दाम, काम के जगहों में जरूरी सुविधाओं जैसे परिवहन और शिशुगृह, कम करने वाली महिलाओं के लिए शहर में अधिक होस्टल्स, शहरों में मकान किराया के उच्चतम सीमा तय करने का क़ानून, पाइप द्वारा हर घर में साफ़ पानी, जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों के तहत अफ्स्पा को वापस लेने, पति द्वारा पत्नी के साथ जबरदस्ती सेक्स को आपराधिक घोषित करने, महिलाओं और बच्चियों के खरीद-बिक्री पर तुरंत रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाये जाने को लेकर, पुलिस थानों में पुलिस कि असंवेदनशीलता एवं एफआईआर दर्ज करने से मना करने वालों पर उचित कदम उठाने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांगें शामिल हैं|
सी.एस.डब्ल्यू केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्री, मेनका गाँधी के कथनों की कड़ी भर्त्सना करता है, जिसमे वो कामकाजी महिलाओं और छात्राओं पर छात्रावासों द्वारा उनपर थोपे गये दमनकारी नियमों का समर्थन करती हैं और अपना महिला-विरोधी और पितृसत्तात्मक नज़रिया महिलाओं पर थोपने के लिए उनसे माफ़ी की मांग करता है|




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