कामगारों ने मजदूर वर्ग के हालात को साथ में मिल कर बदलने की कसम खाई Workers vowed to change the circumstances of the working class together



  • मजदूर एकता केंद्र(WUCI) के मई दिवस के कार्यक्रम में कामगारों ने भारी संख्या में हिस्सेदारी निभाई
  • भाजपा सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक-साथ खड़े होने का लिया निर्णय
  •  सभी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी के अधिकार के लिए मजबूत आन्दोलन का लिया संकल्प


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  आज कामगारों ने मजदूर एकता केंद्र(WUCI) द्वारा आयोजित मई दिवस कार्यक्रम में भारी संख्या में अपनी हिस्सेदारी निभाई| यह कार्यक्रम आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित किया गया था, जहाँ हर दिन लाखों मजदूर 12-14 घंटे काम करते हैं| आर्थिक बदहाली में जी रहे मजदूरों को 5-7 हजार रुपये में काम करवाया जा रहा है| असंगठित क्षेत्र के यह मजदूर संगठित क्षेत्र के मजदूरों के मुकाबले अति-शोषण का शिकार हो रहे हैं| ज्ञात हो की आज देश में भाजपा सरकार मजदूर विरोधी नीतियों को खुले-आम अच्छा बताकर लागू करना चाहती है| वो मौजूदा श्रम कानूनों जिनका अभी भी खुले तौर पर उल्लंघन होता है उनको लागू करने के स्थान पर नए कानूनों द्वारा, मजदूर अधिकार को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहती है| सरकार लगातार ‘मेक इन इंडिया’ के जुमले उछाल कर मजदूरों को ठग रही है और उनका श्रम सस्ते दामों में विदेशी कंपनियों को बेचने के कानून बना रही है|
ज्ञात हो कि आज भी बिनी किसी सुरक्षा के मानकों के पालन के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से भी नीचे काम करने को मजबूर होना पड़ता है| छोटी फैक्ट्रियों में तो सिर्फ न्यूनतम मजदूरी का ही नहीं अन्य श्रम कानूनों का भी खुलेआम उल्लंघन किया जाता है| मजदूर बेहद कठिन काम भी बिना किसी सुरक्षा साधनों के करने को मजबूर हैं| आये दिन श्रम कानूनों में बदलाव कर के पूंजीपतियों का मुनाफा बढाया जा रहा है| हर क्षेत्र में ठेकेदारी प्रथा बढ़ी है जिसके कारण `कंपनियां अपनी मनमर्जी से मजदूर को काम से निकल सकती है| जहाँ एक ओर मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया का नारा दिया है वहीँ दूसरी ओर जो कामगार सचमुच देश का निर्माण करते हैं उनके श्रम की कोई इज्ज़त नहीं है| बहुसंख्यक मजदूर एक कमरे के घरों में स्लमों/बस्तियों में रहने को मजबूर हैं| ये वही बस्ती हैं जिनको कभी भी डी.डी.ए द्वारा तोडा जा सकता है| कामगार वर्ग उन्ही बस्तियों में रहने को मजबूर हैं जहाँ पानी की टैंकर आने पर ऱोज लडाई होती हैं|
आज के कार्यक्रम में मजदूर आन्दोलन के गीत भी प्रस्तुत किये गए| सभा में कामगारों ने मई दिवस के महत्व को याद किया जब मजदूरों ने साथ लड़ कर 8 घंटे काम के अधिकार को लिया था और इस ओर अपना आन्दोलन बढाने का भी निर्णय लिया| कामगारों ने प्रण लिया कि वो इस मजदूर-विरोधी भाजपा सरकार और पूँजीवादी व्यवस्था के खिलाफ साथ मिलकर संघर्ष करेंगे और मजदूरों के शोषण पर आधारित इस व्यवस्था में बदलाव लायेंगे|




Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment