मेवाड़ में योग व मानव पुर्ननिर्माण पर गोश्ठी Goshthi on Yoga and Human Reconstruction in Mewar



बसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता )  योग सभी अंगों व क्रियाओं को प्राकृतिक क्रियाओं से सक्षम बना मानव शरीर के नवनिर्माण में सहयोग करता है। यह विचार शनिबार को बसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में योग पर आधारित विशेष संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त की। संगोष्ठी में योग और मानव के पुनर्निर्माण पर चर्चा हुई। संगोष्ठी के आयोजन का मकसद प्राचीन व आधुनिक मानव उत्थान एवं निर्माण से जुड़े विषयों को सबके सामने लाना था। इसमें अनेक कंप्यूटर इंजीनियर, डाॅक्टरों व योगाचार्यों ने हिस्सा लिया। 
            वक्ताओं ने बताया कि मनुष्य सृष्टि के आरम्भ से ही अपनी शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक व आध्यात्मिक बाधाओं से बचने को आतुर रहता है और उत्थान के मार्ग को ढूंढता व प्रशस्त करता है। आधुनिक युग में मेडिकल साइंस व दूसरे विज्ञान के अंग भी मानव को सशक्त व सक्षम बनाने में जुटे हैं। इन प्रयासों का योगदान मानव पुनः निर्माण के रूप में हो रहा है। उन्होंने बताया कि मानव पुनः निर्माण के दो मुख्य रूप विज्ञान एवं योग है। विज्ञान में कृत्रिम अंग जैसे त्वचा, हड्डी, किडनी, फेफड़े, हाथ, टांग, हृदय आदि हैं जबकि कृत्रिम अंग रुधिर व मज्जा आदि पर भी काफी काम हुआ है और हो रहा है। भारतीय शास्त्रों के अनुसार मनुष्य शरीर के चार रूप-स्थूल, सूक्ष्म, कारण व महाकारण हैं। चारों के मिलने से ही मनुष्य जीवित व सक्षम है। उन्होंने बताया कि विज्ञान में योग पर बहुत से शोध व लेख प्रकाशित हो चुके हैं। परन्तु ज्यादातर लोग योग को अवैज्ञानिक ही मानते हैं। संगोष्ठी में मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया, निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल, डाॅ. सतीश चंद्र गुप्ता, मगन सिंह त्यागी, हरिदास, डाॅ. एचएस शर्मा, डाॅ. रावत, डाॅ. राना, कर्नल टीपीएस त्यागी आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।  




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