नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) आज, नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) के कार्यकर्ताओं ने अन्य जनवादी लोगों के साथ मिलकर दार्जीलिंग में गोरखा समुदाय का बर्बरतापूर्वक दमन करने वाली पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया|
ज्ञात हो कि पिछले कुछ दिनों से गोरखा समुदाय अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार का विरोध कर रहा है| यह मांग उनकी आकांक्षाओं को प्रदर्शित करती है और उनकी अपेक्षाओं को जानने के लिए सरकार को एक जनमत-संग्रह कराना चाहिए| परन्तु, इसके विपरीत बंगाल सरकार भाजपा-शासित केंद्र सरकार के साथ मिलकर उनका दमन कर रही है| पश्चिम बंगाल सरकार के इस कदम से लोगों का अपनी मांग उठाने का हक तो छिनता ही है, साथ ही सरकार की जनता के अधिकार सुनिश्चित करने के कर्तव्य से भी जनता का मोहभंग करता है|
ज्ञात हो कि गोरखा जनसमूह जो दार्जीलिंग क्षेत्र में रहता है, उनको ऐतिहासिक तौर पर भेदभाव झेलना पड़ा है| दशकों से चल रहे इस भेदभाव के कारण उनमे क्रोध है| बंगाल सरकार को उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर कदम उठाने चाहिए ताकि इलाके में शांति बहाल हो सके|
कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन रेजिडेंट कमिश्नर को सौंपकर, निम्नलिखित मांगों को उठाया: - गोरखा समुदाय के जनतांत्रिक आन्दोलन का दमन तुरंत बंद किया जाए, दार्जीलिंग हिल्स से तुरंर सेना को हटाया जाए, सभी राजनैतिक कैदियों को रिहा किया जाए, जनता के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया जाए, जन-आकांक्षाओं को जानने के लिए जल्द-से-जल्द जनमत संग्रह कराया जाए, जनता के सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, इन्टरनेट बैन को तत्काल हटाया जाए,
नेफिस जन-आन्दोलनों के दमन के खिलाफ खड़ा रहा है और अगर इन मांगों को जल्दी नहीं माना गया तो आने वाले दिनों में अपना आन्दोलन और तेज़ करेगा |




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