- कट-ऑफ अभी भी बहुत ज्यादा और सीट कम! डेढ़ लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में
- वंचित छात्रों को उच्च शिक्षा तक लाने के लिए कम कट-ऑफ और सीट बढ़ाने की मांग उठायी
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) क्रांतिकारी युवा संगठन(केवाईएस) डीयू प्रशासन के कट-ऑफ कम करने के दावे की कड़ी भर्त्सना करता है| ज्ञात हो कि कट-ऑफ अभी भी बहुत ज्यादा है और सीट काफी कम, जिससे इस साल भी एडमिशन लेने के इच्छुक डेढ़ लाख से भी अधिक छात्रों को एडमिशन नहीं मिलेगा| ज्ञात हो कि केवाईएस कार्यकर्ताओं ने कुछ दिन पहले डीयू एडमिशन कट-ऑफ जलाकर दिल्ली विश्वविद्यालय के सरकारी स्कूल के छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था| कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में कट-ऑफ का एक सांकेतिक पुतला जलाकर उसके द्वारा वंचित छात्रों के खिलाफ किये जा रहे भेदभाव की भर्त्सना भी की थी| इस प्रदर्शन में सरकारी स्कूल के छात्र भी मौजूद थे, जिनको ऊँचे कट-ऑफ के कारण उच्च शिक्षा का स्वप्न छोड़ना पड़ेगा| ज्ञात हो कि यह कट-ऑफ महंगे प्राइवेट स्कूल के छात्रों के अंकों पर निर्धारित किया गया है, जिसको शैक्षणिक रंगभेद ही कहा जा सकता है क्योंकि कट-ऑफ के माध्यम से बहुसंख्यक छात्रों को जो वंचित परिवारों से आते हैं उन्हें उच्च शिक्षा से बाहर किया जाता रहा है|
ज्ञात हो कि इस साल 2 लाख 20 हज़ार से अधिक छात्रों ने स्नातक के विभिन्न कोर्सों के लिए आवेदन किया है, परन्तु विश्वविद्यालय में बस 56000 सीटें है जिसका मतलब है कि करीब 1,7 0,000 छात्रों को विश्विद्यालय और उच्च शिक्षा से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा| ज्ञात हो किदिल्ली विश्वविद्यालय में पढने के इच्छुक सरकारी स्कूल के छात्रों को एडमिशन लेने के लिए प्राइवेट स्कूल के छात्रों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है| इस प्रतिस्पर्धा में वो ऊँचे कट-ऑफ होने के कारण हार जाते हैं और ज्यादातर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का यहीं अंत हो जाता है| ज्ञात हो कि सरकारी स्कूल के यह छात्र ज्यादातर सामाजिक और आर्थिक तौर पर वंचित वर्ग से आते हैं और स्लम और झुग्गी बस्ती में रहते हैं| इन छात्रों को को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी उच्च शिक्षा की ज्यादा ज़रुरत है| इसके विपरीत हर साल उन्हें कट-ऑफ के नाम पर बाहर कर दिया जाता है| कार्यकर्ताओं ने सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 10% अक्षमता निवारण रियायत अंक (डेप्रीवेशन पॉइंट्स) को लागू करने की मांग को भी उठाया|
ऊँचे कट-ऑफ और कम सीटें कई कारण से बेहद समस्यापूर्ण हैं| ज्ञात हो कि कम सीटों के कारण आरक्षित सीटें भी कम रहेंगी, जिस कारण दलितों को शोषण से बाहर निकालने की बात हमेशा ही एक दूर का स्वप्न रहता है| इस कारण उच्च शिक्षा में आने के इच्छुक दलित छात्र सीटें न होने के कारण अपने जातीय कामों में फंसने को मजबूर हो जाते हैं व शिक्षा के माध्यम से अपनी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं से बाहर निकलने के एकमात्र विकल्प से भी वंचित हो जाते हैं| केवाईएस आने वाले दिनों में दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों की भेद-भावपूर्ण शिक्षा नीति के खिलाफ अपना संघर्ष तेज़ करेगा|


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