नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में आज (शुक्रवार) रात 12 बजे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर दिया जाएगा. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा था कि जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में जीएसटी विधेयक के पारित होने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के एकीकरण का सपना सच हो गया. जेटली ने इस ‘ऐतिहासिक’ सुधार की कल्पना करने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को भी दिया और कहा कि उसे कांग्रेस ने आगे बढ़ाया.
यहां तालकटोरा स्टेडियम में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा था कि वाजपेयी सरकार द्वारा 2003 में गठित समिति ने जीएसटी का विचार पेश किया था और सिफारिश की थी कि सभी करों को मिलाकर एक कर होना चाहिए. जेटली ने कहा था कि इसके बाद जब सरकार बदली तो उसके बाद वित्त मंत्री बने पी चिदंबरम को भी इसमें कुछ अच्छाई दिखाई दी और उन्होंने जीएसटी को लागू करने के लिए 2010 का लक्ष्य रखा, लेकिन वे इस सुधार को ला नहीं सके.
इससे पहले बुधवार को नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बीच जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य में जीएसटी के कार्यान्वयन से जुड़े प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था. जीएसटी पास करने वाला जम्मू-कश्मीर आखिरी राज्य है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने बुधवार को प्रस्ताव पेश किया था, जिसे राष्ट्रपति के आदेश के जरिए पारित किया गया था. आदेश में केंद्र से राज्य के विशेष दर्जे तथा विशेष कराधान शक्तियां की हिफाजत करने को कहा गया था. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के आदेश के जरिए किसी भी तरह से संविधान के अनुच्छेद 370 से समझौता नहीं किया गया है.
दो दिनों की चर्चा के बाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था, हालांकि नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस और माकपा तथा एक निर्दलीय विधायक ने मौजूदा प्रारूप में राज्य में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू करने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. इससे पहले द्राबू ने बहस का जवाब देते हुए कहा था कि प्रस्ताव में केंद्र से राज्य के विशेष दर्जे तथा विशेष कराधान शक्तियां की हिफाजत करते हुए जीएसटी लागू करने की मांग की गई है.
वहीं, जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू करने के विरोध में राज्य विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे निर्दलीय विधायक शेख अब्दुल राशिद को उनके कई समर्थकों के साथ हिरासत में ले लिया गया था. पुलिस के एक अधिकारी ने कहा था कि जहांगीर चौक के पास सिविल सचिवालय परिसर के बाहर राशिद और उनकी अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के समर्थकों ने एक विरोध मार्च निकाला था. इसी परिसर में विधानसभा है.
अधिकारी ने कहा था कि राशिद और उनके समर्थकों ने सरकार और जीएसटी के खिलाफ नारेबाजी की थी. प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि नई कर व्यवस्था को लागू करने से राज्य का विशेष दर्जा और इसकी आर्थिक स्वायत्ता खत्म हो जाएगी. अधिकारी ने यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय की ओर मार्च करने की कोशिश की तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया था. उन्होंने कहा कि राशिद सचिवालय परिसर के दरवाजे के पास लेट गए थे, जिससे अंदर जाने का रास्ता कुछ वक्त के लिए बाधित हुआ था. हालांकि पुलिस उन्हें वहां से हटा कर ले गई थी.



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