आॅटो चालक मनदीप की संदिग्ध मौत को लेकर थानाध्यक्ष समेत आठ निलम्बित Eight suspended suspended for autopsy



 
 
                                                               एस.पी. चैहान 
साहिबाबाद, ( प्रमुख संवाददाता )  लाजपत नगर निवासी आॅटो चालक मनदीप सिंह नेगी की संदिग्ध मौत के मामले का संज्ञान लेते हुए एसएसपी गाजियाबाद हरिनारायन सिंह ने थाना साहिबाबाद के एसएचओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को निलम्बित कर दिया है। जिन्हें निलम्बित किया गया है उनमें थाने के एसएसआई सहित चार उप निरीक्षक तथा तीन मुंशी (क्लर्क)हैं। एसएसपी ने इस मामले को घोर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्रवाई कर अन्य पुलिस कर्मियों को यह संदेश दिया है कि लापरवाहों सुधर जाओ। निलंबित होने बालों में एसएचओ साहिबाबाद सुधीर त्यागी, एसएसआई अखिलेश गौढ़, एसआई नीरज त्यागी,गजेन्द्र सिंह व अतुल कुमार के अलावा थाने के  मुंशी राहुल मिश्रा,प्रेम सिंह तथा संजीव कुमार हैं।  
      गौरतलव है कि मृतक मनदीप पुत्र गिरीश सिंह निवासी जी81 लाजपत नगर पिछली 9 जुलाई की रात 10 बजे घर से  गायब हो गया था जिसकी गुमशुदगी की सूचना घरवालों ने थाना साहिबाबाद में 10 जुलाई में दी थी। लेकिन साहिबाबाद पुलिस ने 12 जुलाई को  मनदीप की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। 14 जुलाई को मनदीप के परिजनों को  साहिबाबाद थाने में बुलाकर  एक मृतक युवक की फाइल फोटो पहचानने के लिए उन्हें दिखाई । जिसकी पहचान उन्होंने अपने लापता बेटे मनदीप सिंह नेगी के रूप में की थी। तव उन्हें पुलिस से पता चला कि थाना साहिबाबाद पुलिस ने मनदीप को 13जुलाई में ही लावारिश मानकर अंतिम संस्कार कर दिया है। इससे परिवारवाले नाराज हो गये तथा उन्होंने जीटी रोड को जाम कर मनदीप की मौत के मामले में जिम्मेदार पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
        प्रदर्शनकारियों को समझाते हुए जो कहानी एएसपी अनूप सिंह ने सुनाई उसमें तथा तत्कालीन थानाध्यक्ष सुधीर त्यागी एवं पीसीआर कर्मियों की कहानी में बहुत बिरोधाभाश था। अगले दिन फिर से प्रदर्शन हुआ तो एक और कहानी सामने आयी। थानाध्यक्ष ने बताया था  कि मनदीप को पुलिस नियंत्रण कक्ष की सूचना पर पीसीआर श्यामपार्क एक्स. से 9जुलाई की रात में लेेकर आयी थी,तव वह अपना नाम पता नहीं बता सका था। उसे तीन लोगों की सूचना पर यहां लाया गया। हालत खराव थी इसलिये निजी अस्पताल नरेन्द्र मोहन में भर्ती राया गया। वहां से उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिये जिला अस्पताल ले जाया गया। जिसने उपचार के दौरान 10जुलाई को दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव की पहचान के लिये नियमानुसार 72 घंटे तक संरक्षित रखा लेकिन पहचान नहीं हुई। 13जुलाई को उसका अज्ञात में अंतिम संस्कार करा दिया गया। पुलिस ने उसे चोर बताकर पुलिस को सूचना देने वाले तीनों युवकों अजीत,अर्जुन आदि के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली।
थानाध्यक्ष के बयान के उलट पीसीआर कर्मियों ने कहा कि जव वे मनदीप को थाने लाये थे तव वह ठीक था तथा उसने अपना नाम नेगी बताया था। नेगी नाम से उसे नरेन्द्र मोहन अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसे 106 डिग्री बुखार था। चिकित्सकों की राय के बिपरीत उसे एक बेहतर सुविधाओं वाले इस अस्पताल से रैफर करा कर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। जिला अस्पताल में कैसी चिकित्सा सेवायें हैं ये सभी जानते हैं। यहां थाना साहिबाबाद की करामाती पुलिस ने उसे अज्ञात में भर्ती कराया था और उसने रात में ही दम तोड़ दिया। नेगी नाम का पता चलने के बाबजूद उसका अपने थाने से ही गुमशुदा मनदीप सिंह नेगी की हुलिया से मिलान जांच अधिकारी ने नहीं किया। 
    अव सवाल यह है कि मनदीप की मौत कैसे हुई, पुलिस की पिटायी से या जिन्होंने उसे चोर समझ कर पीटा, यह जांच का विषय है लेकिन यह तो स्पष्ट है कि 24 साल का मनदीप पुलिस की लापरवाही की मौत मर गया।




Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment