वसंुधरा, ( प्रमुख संवाददाता ) वसुंधरा में आयोजित भागवत कथा के चैथे दिन कथा व्यास ने भगवान श्री नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा जी द्वारा रचित इस सृष्टि की कथा का वर्णन किया।
व्यास याज्ञिक महराज ने आज समझाया कि जल से ही जीवन सम्भव होता है। अतः हमंे जल और पर्यावरण दोनों का ही संरक्षण करना चहिये। इससे ही लम्बी आयु और रोग रहित जीवन का आधार सम्भव है। आगे के प्रसंग में उन्होंने बताया कि भगवत साधना के लिये गृहस्थ आश्रम सर्वश्रेध्ठ आश्रम है। इसकी प्रेरणा हमें ऋषि कर्दम और देवहूति के आदर्श गृहस्थ से मिलती है। बाद में नारद आदि ब्रह्मा जी के दस मानस पुत्रों का वर्णन करते हुए उन्होेंने बताया कि जहां सत्य धर्म निष्काम कर्म भाव होता है वहीं कपिल महराज जैसे पुत्र के रूप में भगवान अवतरित होते हैं। यह ऋषि परम्परा की विलक्षणता है कि एक पुत्र अपनी माता का दिव्य ज्ञान का दर्शन कराता है । भरत चरित्र समझाते हुए पं जय प्रकाश याज्ञिक जी ने बताया कि मोह आसक्ति के रहते मोक्ष सम्भव नहीं है । मोह के करण ही भरत जी को तीन जन्म भोगने पड़े ।
श्रोताओं से खचाखच भरे पण्डाल में भक्तो ने याज्ञिक जी की औजस्वी वाणी और माधुर्य से भजनों का आनंद लिया ।
कथा में पियूष तिवारी, सुनील तिवारी, गिरीश आर्य, विजय कुमार मिश्र, एके गुप्ता, विपिन त्यागी, टीआर शर्मा, श्रीमती उषा तिवारी, शीला चैहान, अनिता शर्मा, हरि ओम शर्मा, केपी मिश्र तथा सत्य प्रकाश शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे ।



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