जेपी इंफ्राटेक मामले में IDBI बैंक पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई 11 को Supreme court hearing IDBI bank in JP Infratech case, hearing on 11



नई दिल्ली, ( शांतिदूत न्यूज नेटवर्क )  उच्चतम न्यायालय जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही पर रोक लगाने के अपने आदेश के खिलाफ आईडीबीआई बैंक की याचिका पर 11 सितंबर को सुनवाई के आज तैयार हो गया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव राय और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बैंक के इस कथन पर विचार किया कि इलाहाबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगाने से स्थिति एकदम उलट गयी है क्योंकि इससे कंपनी बकाया प्रवर्तक हो गयी है।


बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने कहा कि न्यायालय के कल के आदेश के बाद जेपी समूह एक बार फिर इस कंपनी का प्रभारी हो गया है। जेपी इंफ्राटेक से मकान खरीदने वाले एक व्यक्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने बैंक की इस दलील का पुरजोर विरोध किया और कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश से मकान खरीदने वाले खुश हैं। शीर्ष अदालत ने कल कुछ मकान खरीददारों की याचिका पर सुनवाई के बाद जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इन खरीददारों का कहना था कि उन्हें न तो मकान मिले और न ही अपना पैसा वापस मिला है। ये खरीददार अपने हितों की रक्षा का अनुरोध कर रहे हैं।

दिवालिया संहिता, 2016 के अंतर्गत बैंकों की तरह मकान खरीददार सुरक्षित कर्जदार की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसलिए उन्हें तभी उनका पैसा वापस मिलेगा जब सुरक्षित कर्जदारों के धन की अदायगी के बाद कुछ बचेगा। इन खरीददारों का दावा है कि उन्होंने फ्लैट के लिये करीब 25 हजार करोड़ रूपए का निवेश किया है जबकि दूसरे दावेदारों ने महज पांच सौ करोड़ रूपए की बकाया रकम के लिये कंपनी को दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही शुरू कर रखी है। जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं में करीब 32000 व्यक्तियों ने फ्लैट बुक कराये हैं।





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