'गैंबलिंग क्‍वीन' के नाम से कुख्‍यात संदीप कौर से प्रेरित है कंगना रनोट स्‍टारर 'सिमरन' - kangana ranaut starer simran is inspired from story of sandeep kaur





नई द‍िल्‍ली : कंगना रनोट स्‍टारर 'सिमरन' शुक्रवार को रिलीज हो गई है. हंसल मेहता निर्देश‍ित इस फिल्‍म में कंगना का किरदार काल्‍पनिक नहीं बल्‍कि भारतीय मूल की एक अमेरिकन महिला संदीप कौर से प्रेरित है. 'बॉम्‍बशेल बैंडिट' और 'गैंबलिंग क्‍वीन' के नाम से कुख्‍यात संदीप कौर फिलहाल अमेरिका की जेल में बंद है. आपको बता दें कि संदीप को बैंक लूटने का दोषी पाया गया था. फिल्‍म 'सिमरन' में कंगना का किरदार कैसा है यह तो आपको फिल्‍म देखने के बाद ही पता चलेगा लेकिन आज हम आपको उस संदीप कौर के बारे में बता रहे हैं जिसकी पूरी जिंदगी किसी फिल्‍मी कहानी से कम नहीं है.


संदीप कौर का जन्‍म 11 नवंबर 1989 को चंडीगढ़ में हुआ था. उसकी परवरिश एक पारंपरिक भारतीय परिवार में हुई. उसके पिता अमेरिका में रह रहे थे और सात साल की उम्र में वो भी अपनी मां और भाई के साथ वहीं चली गई. साल 2015 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्‍यू में संदीप ने बताया था कि किस तरह उसके मां-बाप ने उसे मोबाइल फोन, टीवी और यहां तक कि दोस्‍तों की संगत से भी दूर रखा. उसके मुतबिक अमेरिका में साल 2001 में जब 9/11 के हमले हुए तब स्‍कूल में उसे और उसके भाई को निशाना बनया गया. बच्‍चे उन्‍हें आतंकवादी कहकर बुलाते थे और इस वजह से दोनों स्‍कूल से गायब रहने लगे.

संदीप जब 14 साल की थी तब बीमारी की वजह से उसकी मां को अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा था. उसी दौरान वह अस्‍पताल की एक नर्स से इतनी प्रभावित हुई कि उसने नर्सिंग को अपना प्रोफेशन बनाने का फैसला कर लिया. 19 साल की में उम्र में वह नर्स भी बन गई. इसके बाद 20 साल की उम्र में उसने घर छोड़ दिया और नर्सिंग में ग्रेजुएशन करने लगी. ख़बरों के मुताबिक साल 2008 में उसने पहली बार स्‍टॉक मार्केट में इंवेस्‍ट किया और करीब दो लाख अमेरिकी डॉलर कमाए. यह वाकई में बड़ी सफलता थी क्‍योंकि उस समय अर्थव्‍यवस्‍था के हालात कुछ अच्‍छे नहीं थे. शेयर बाजार लगातर नीचे जा रहा था. इसके बावजूद संदीप को जो रिटर्न मिला वह अपने आप में बड़ी बात थी.


अब संदीप कौर 21 साल की हो चुकी थी. अपने बर्थडे पर चचेरे भाई के साथ वह पहली बार लास वेगास के कसिनो में गई. यहां आकर पहली बार उसका परिचय गैम्‍बलिंग यानी कि जुए की दुनिया से हुआ. पहली बार जुआ खेलने पर उसने हजार अमेरिकी डॉलर जीते. इसके बाद वह अपने जीते हुए पैसों से फिर जुए की बाजी खेलने लगी. वो जितनी बाजियां हारती उतनी ही बार अपने हारे हुए पैसों को वापस लाने के लिए फिर बाजी लगाती. अब उसे जुए की लत लग चुकी थी. जुआरी उसे लकी गैंबलर कहकर बुलाते थे.


गैंबलिंग की लत ने संदीप कौर को इस कदर अपने चंगुल में फंसा लिया था कि उसने नर्सिंग की नौकरी भी छोड़ दी. लेकिन वो कहते हैं न कि किस्‍मत अगर मेहरबान होती है तो उसे रूठने में भी देर नहीं लगती. ऐसा ही कुछ संदीप के साथ हुआ. जुए में लाखों रुपये जीतने के बाद अब किस्‍मत उसका साथ नहीं दे रही थी. बीबीसी को दिए इंटरव्‍यू में संदीप ने कहा था कि उसने साल 2011 में पहली बार अपने घरवालों के बताया था कि वह जुए में करीब 60 हजार अमेरिकी डॉलर जैसी बड़ी रकम हार चुकी है.


संदीप जुए में एक के बाद बाजियां हारती जा रही थी. जिन लोगों ने उसे उधार दिया था वो अपने पैसे वापस मांग रहे थे. इन सब से तंग आकर वह साल 2012 में अपनी मां के साथ कैलिफोर्निया आ गई. अपना उधार चुकाने के लिए उसने फिर से नर्सिंग का काम शुरू कर दिया. फिर एक दिन संदीप मां को सारी सच्‍चाई पता चल गई और अब उन्‍होंने उसकी शादी कराने का फैसला किया. कई रिश्‍ते भी आए लेकिन संदीप को कोई पसंद नहीं आया. सितंबर 2013 में उसने अपनी पसंद की शादी की. उसका पति हर हफ्ते उसे खर्च के लिए एक हजार डॉलर देता था लेकिन उसने वो पैसे भी जुए में उड़ा दिए. आख‍िरकार 2014 में उसकी शादी भी टूट गई.


एक कहावत है कि जैसा बीज बोओगे वैसा ही फल काटोगे. संदीप के पिछले कर्म उसका पीछा ही नहीं छोड़ रहे थे. जिन लोगों ने उसे उधार दिया था वो लगातार उससे पैसे वापस मांग रहे थे. साल 2014 में दो आदमियों ने उसे धमकी दी कि या तो वो दो दिन में 35 हजार डॉलर लौटाए या उनके लिए काम करे. संदीप के मुताबिक, 'उन्‍होंने कहा कि तुम बैंक में चोरी कर सकती हो, घर में चोरी कर सकती हो. चाहे कुछ भी करो हमें हमारा पैसा वापस चाहिए. उन्‍होंने मुझे बंदूक देने की भी कोश‍िश की.'


एक हफ्ते बाद संदीप कौर ने पहली चोरी को अंजाम दिया. उसने कैलिफोर्निया के एक बैंक से 21 हजार अमेरिकी डॉलर लूट लिए. दूसरी चोरी के दौरान उसने बैंक को यह धमकी दी थी कि अगर उन्‍होंने उसे पैसा नहीं सौंपा तो वो बैंक उड़ा देगी. इसी घटना के बाद से उसे 'बॉम्‍बशेल बैंडिट' कहा जाने लगा. इसके बाद उसने तीन बैंकों को लूटा. आखरिकार सेंट जॉर्ज शहर में बैंक लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. उसे हर चोरी के लिए 20 साल जेल की सजा दी गई. साथ ही उस पर ढाई लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया. लेकिन संदीप के वकील ने उसकी खराब परवरिश का हवाला देते हुए दलील दी कि उसने बहुत कुछ सहा है. इस पर अदालत ने संदीप की सजा को कम करते हुए 66 महीने की जेल की सजा सुना दी. साथ ही उसे लूट की रकम की पाई-पाई लौटाने का आदेश भी द‍िया. बहरहाल, संदीप कौर जेल में बंद है और अपने कर्मों की सजा काट रही है.
Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment