डी.एम.सी.ए कार्यकर्ताओं ने 50 से अधिक मेट्रो स्टेशन पर पर्चा बांटकर किया मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी का विरोध
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) दिल्ली मेट्रो कमयूटर्स एसोसिएशन (डी.एम.सी.ए) कार्यकर्ताओं ने आज 50 से ज्यादा मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो किराए में बढ़ोत्तरी के खिलाफ पर्चा बांटकर कल 10 अक्टूबर को मेट्रो का बड़े पैमाने पर बहिष्कार करने का आह्वान किया| ज्ञात हो कि इस साल मेट्रो किराए में यह बढ़ोत्तरी दूसरी बार की जा रही है| इस बढ़ोत्तरी से किराया दोगुना हो जाएगा| ज्ञात हो कि पहले की गयी किराया बढ़ोत्तरी इतनी ज्यादा थी कि यात्रियों की दैनिक संख्या में औसतन 1.3 लाख की कमी देखी गयी थी| ज्ञात हो कि डी.एम.सी.ए कार्यकर्ताओं ने इस साल मई में किराया बढ़ोत्तरी को लेकर केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डी.एम.आर.सी) के खिलाफ प्रदर्शन किया था| उन्होंने डी.एम.आर.सी को एक ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी कि किराया कम करने की मांग को तुरंत माना जाए| साथ ही, कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर इकठ्ठा होकर तब केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का पुतला फूँका था और डी.एम.आर.सी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जापानी कंपनी के लिए काम करने और दिल्ली की आम जनता की अवहेलना करने की बात कही थी|
डी.एम.सी.ए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डी.एम.आर.सी) के यात्रा-किराए को बढ़ाने के फैसले की कड़ी भर्त्सना करता है| इस फैसले के पीछे मेट्रो को चलाने में हो रहे नुक्सान को कारण बताया गया है| यह पूर्णतः गलत है क्योंकि सरकार व्यापारी घरानों को तो लाखों करोड़ की टैक्स माफी दे रही है, परन्तु किराया बढ़ाने के लिए नुक्सान होने को कारण बता रही है| साथ ही, मेट्रो अधिकारियों और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा दिया जा रहा तर्क कि घाटे के बावजूद मेट्रो का किराया अभी तक नहीं बढ़ाया गया था, पूर्णतः झूठ है क्योंकि पहले से ही मेट्रो का किराया काफी ज्यादा था और मेट्रो को बिलकुल ठसाठस भरकर मुनाफा कमाया जाता था| इसके अतिरिक्त, अन्य देशों में मेट्रो में मुहैया कराई जाने वाली सुविधाएं जैसे शौचालय, पेय-जल इत्यादि की भी दिल्ली मेट्रो में कमी है| साथ ही, दिल्ली मेट्रो अपने कर्मचारियों को ठेके पर नियुक्त करता है और उनको न्यूनतम मजदूरी भी न देकर, और भी अधिक मुनाफा कमाता है|
ज्ञात हो कि किराये में बढ़ोत्तरी के कारण महिलाओं को भीड़-भरी बसों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ेगा, जिससे शोषण के मामले बढ़ेंगे| मजदूरों और छात्रों के लिए भी बढ़े किराए से परेशानी होगी, क्योंकि पहले से ही मेट्रो का किराया काफी ज्यादा था| यह बढ़ोत्तरी अगर वापस नहीं ली जाती है तो दिल्ली में प्रदूषण की समस्या भी बढ़ेगी क्योंकि इससे निजी वाहनों की संख्या में इजाफा होगा जिससे प्रदूषण बढ़ेगा; जबकि समय की ज़रुरत है कि दिल्ली को प्रदूषण-मुक्त बनाया जाए| केंद्र सरकार को अपना यह जनता-विरोधी कदम वापस लेने के लिए मजबूर करने को लेकर डी.एम.सी.ए ने कल 10 अक्टूबर को मेट्रो यात्रियों से मेट्रो का बड़े पैमाने पर बहिष्कार करने का आह्वान किया है|




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