नई दिल्लीः यूपी में योगी सरकार द्वारा शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के विलय के प्रस्ताव पर सपा नेता आजम खान ने कड़ा ऐतराज जताया है. आजम खान ने कहा है कि मैंने खुद मंत्री रहते हुए दोनों बोर्ड के विलय को लागू नहीं किया था. उन्होंने कहा कि वो आज भी नहीं चाहते हैं कि दोनों का विलय हो जाए. आजम ने कहा कि बीजेपी को माफी मांगनी चाहिए कि उनकी सरकार को ये नहीं मालूम कि संसद से ये नियम बने जमाना हो गया. दरअसल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड का विलय करके ‘उत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्ड’ के गठन पर विचार करेगी. इसके लिये शासन से प्रस्ताव मांगा गया है.
यूपी के वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने बताया कि उनके विभाग के पास पत्रों के माध्यम से ऐसे अनेक सुझाव आये हैं कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड का परस्पर विलय कर दिया जाए, ऐसा करना कानूनन सही भी होगा. मोहसिन रजा ने कहा था “उत्तर प्रदेश और बिहार को छोड़कर बाकी 28 राज्यों में एक-एक वक्फ बोर्ड है. वक्फ एक्ट-1995 भी कहता है कि अलग-अलग शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड गठित करने के लिये कुल वक्फ इकाइयों में किसी एक तबके की कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सेदारी होना अनिवार्य है. यानी अगर वक्फ की कुल 100 इकाइयां हैं तो उनमें शिया वक्फ की कम से कम 15 इकाइयां होनी चाहिये. उत्तर प्रदेश इस वक्त इस नियम पर खरा नहीं उतर रहा है.”
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने उत्तर प्रदेश के वक्फ राज्यमंत्री मोहसिन रजा पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्यमंत्री का कथन कि वर्तमान में शिया वक्फ कुल वक्फों की संख्या से 15 प्रतिशत कम है, इसलिए शिया व सुन्नी दोनों बोर्डों को एक कर दिया जाएगा, जानकारी के अभाव में दिया गया बयान है.रिजवी ने मीडिया से कहा कि शिया वक्फ बोर्ड द्वारा अयोध्या स्थित राम मंदिर को लेकर हाईकोर्ट में मंदिर के पक्ष में जो हलफनामा दाखिल किया गया है, उससे कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संस्थाएं व धर्मगुरु घबराए हुए हैं. ये सभी बाबरी मस्जिद के पैरोकार हैं.
इसी तरह के कुछ धर्मगुरुओं के संपर्क में वक्फ राज्यमंत्री हैं. उन्होंने कहा कि राज्यमंत्री का ऐसा आपत्तिजनक बयान राम मंदिर के निर्माण में बाधा उत्पन्न करने की साजिश लगती है. राज्यमंत्री रजा पहले भी कम मालूमात होने के कारण अवैधानिक कार्यवाही करके सरकार की किरकिरी करा चुके हैं.
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जु़फ़र फ़ारुकी ने कहा कि सरकार अगर शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों का विलय करना चाहती है तो वह इसका स्वागत करते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1999 में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने इन दोनों बोर्ड की अलग अलग स्थापना की थी. ऐसे में सवाल यह है कि क्या मौजूदा बीजेपी सरकार की नजर में इसी पार्टी की तत्कालीन सरकार का फैसला सही नहीं था. रजा ने कहा कि केन्द्रीय वक्फ परिषद के मुताबिक, उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पास मात्र तीन हजार वक्फ इकाइयां हैं. अगर हम उसको पांच हजार भी मान लेते हैं तो भी अलग शिया वक्फ बोर्ड रखने का कोई मतलब नहीं है. अलग-अलग अध्यक्ष, मुख्य अधिशासी अधिकारी और अन्य स्टाफ रखने से फिजूलखर्ची ही होती है. इससे सरकार पर बोझ बढ़ता है.
मालूम हो कि केन्द्रीय वक्फ परिषद ने उत्तर प्रदेश के शिया तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड में अनियमितताओं की शिकायत पर जांच करायी थी. गत मार्च में आयी जांच रिपोर्ट में तमाम शिकायतों को सही पाया गया था. वक्फ राज्यमंत्री रजा ने शिया और सुन्नी बोर्ड को लेकर अलग-अलग तैयार की गयी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी. रजा के मुताबिक, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड जल्द ही भंग किए जाएंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिलने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है



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