नई दिल्ली: दिसंबर 2012 गैंगरेप पीडि़ता की मां ने राहुल गांधी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने उनके बेटे को जो सलाह दी, उसी की बदौलत वह पायलट बनने में कामयाब हुआ. निर्भया की मां आशा देवी ने एक अंग्रेेेेजी मैगजीन से बातचीत करते हुए कहा कि राहुल ने उनके बेटे को कभी हार नहीं मानने की सलाह दी. आशा देवी ने कहा, ''उस त्रासदी ने मेरे बेटे को तोड़ दिया लेकिन उसके इरादे को नहीं डिगा पाया. अब वह राहुल गांधी की बदौलत पायलट बन गया है. इस वक्त वह गुरुग्राम में कमर्शियल एयरलाइन का पायलट बनने की फाइनल ट्रेनिंग ले रहा है और उसके बाद जल्द ही विमान उड़ा सकेगा.''
आशा देवी ने कहा कि दिसंबर, 2012 की घटना से उनके बेटे को गहरा धक्का लगा लेकिन राहुल गांधी ने उसको पायलट ट्रेनिंग कोर्स को करने के लिए प्रोत्साहित किया. आशा देवी ने कहा, ''राहुल गांधी ने मेरे बेटे की काउंसलिंग करते हुए कहा कि अपने परिवार को सहारा देने के लिए जीवन में कुछ बेहतर करने का प्रयास करो. राहुल ने उसको स्कूल पूरा होने के बाद पायलट ट्रेनिंग कोर्स को करने की सलाह दी.''
2013 में उसने रायबरेली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में एडमिशन लिया. आशा देवी ने कहा, ''जब वह पढ़ाई कर रहा था तो राहुल उससे फोन पर बात कर लेते थे और 18 महीने के उस पायलट ट्रेनिंग कोर्स के दौरान उन्होंने उसको मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ने और कभी हार नहीं मानने की सलाह दी.'' आशा देवी ने यह भी कहा जब उसकी पढ़ाई पूरी हो गई, उसके बाद भी वह कांग्रेस नेता के साथ संपर्क में रहा और यहां तक कि प्रियंका गांधी ने फोन कर उनके परिवार के स्वास्थ्य का हाल-चाल लिया.
इससे पहले दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने एक नवंबर को तिहाड़ जेल प्रशासन और दक्षिणी जिले के डीसीपी को निर्भया के बलात्कारियों को मौत की सजा ना दिए जाने पर नोटिस जारी किया. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, निर्भया की मां आशा देवी ने राज्य महिला अयोग से शिकायत की थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पांच महीने बाद भी दोषियों को मृत्युदंड नहीं दिया गया. सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी.
दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन स्वाति जयहिंद ने निर्भया की मां की अर्जी पर तत्काल संज्ञान लेते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन और डीसीपी (साउथ) को नोटिस जारी किए. नोटिस में उन्होंने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पांच महीने बाद भी दोषियों को फांसी क्यों नहीं दी गई.
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2012 को दक्षिणी दिल्ली में निर्भया के साथ गैंगरेप की घटना से समूचा देश हिल गया था. सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी.



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