नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टरेट की उपाधि मिलनी थी लेकिन प्रियंका रविवार को घने कोहरे की वजह से वह इसमें शामिल नहीं हो पाईं। इस पर प्रियंका ने आहत मन से सोशल मीडिया पर मेसेज लिखा - मुझे दुख है कि मैं बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त नहीं कर सकी। हम हवाईअड्डे पर एटीसी की हरी झंडी का इंतजार ही करते रह गए।
उन्होंने यह भी बताया कि मेरी टीम ने वहां जाने के लिए अन्य सभी संभावित विकल्पों का भी पता लगाया, लेकिन कोहरे ने आज के लिए सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। वहां पुराने दोस्तों और परिवार से भी मिलना था लेकिन ये नहीं हो पाया। विश्वविद्यालय के चांसलर केशव कुमार अग्रवाल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन और उत्तर प्रदेश के वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल की उपस्थिति में प्रियंका को सम्मानित किया जाना था।
इसी बीच यूनिसेफ की वैश्विक सद्भावना राजदूत प्रियंका चोपड़ा कई देशों में जाकर बच्चों के अधिकारों पर बात कर रही हैं। प्रियंका का मानना है कि समाज में बदलाव लाने के लिए कि हमें व्यक्तिगत तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और समाज से इन बुराइयों को जड़ से उखाड़कर फेंकना चाहिए। हमें बंद दरवाजों के अंदर नहीं, बल्कि सामने आकर बात करनी चाहिए।
प्रियंका ने हाल ही में यूनिसेफ कार्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान कहा - मुझे लगता है कि पिछले 10 सालों में काफी बदलाव आया है, क्योंकि आज की पीढ़ी किसी से नहीं डरती है। शायद मेरी पीढ़ी के लोगों को थोड़ा डर लगता था। हमारे माता-पिता ने जिन चीजों का सामना किया, हमने उसे बदला और हमारी पीढ़ी जिन चीजों का सामना कर रही है, उन्हें आज की नई पीढ़ी बदलेगी और इसके लिए हमें उन्हें लगातार सशक्त करना होगा।
बाल विवाह, दहेज प्रथा, शिक्षा या स्वच्छता जैसी तमाम समस्याओं को सुलझाने के लिए लोग नेताओं या बॉलीवुड हस्तियों की तरफ देखते हैं, जबकि कई समस्याएं लोग एकजुट होकर खुद भी सुलझा सकते हैं। प्रियंका का इस पर कहना है - मुझसे हर कोई यह सवाल करता है कि आप क्या कर रही हैं या आप क्या करेंगी। मैं पिछले 10 साल से इस पर काम कर रही हूं। प्रियंका का कहना है कि देश की समस्याएं दूर करना सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है। हमारे देश की समस्याओं को कोई और आकर नहीं ठीक करेगा, बल्कि हमें ही मिलकर करना होगा। हम अपने स्तर पर छोटी-छोटी चीजों को भी बदल सकते हैं।
सुष्मिता सेन व रवीना टंडन जैसी कई अभिनेत्रियों ने गर्ल चाइल्ड (बच्चियों) को गोद लिया है। भविष्य में अगर आपको भी ऐसा मौका मिलता है तो क्या आप भी कुछ ऐसा करेंगी? इस सवाल पर प्रियंका का कहना है कि वह अपना फाउंडेशन चलाती हैं, जहां 80 से ज्यादा बच्चे हैं। मैं उन्हें खुद पढ़ाती भी हूं और यह पूरी तरह स्वयंसेवी संस्था है। मेरे पास उनके रिपोर्ट कार्ड्स आते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि यह मेरे गोद लिए बच्चे ही हैं।



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