शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश होगा एफआरडीआई बिल - new financial regulation frdi bill modi government may be new villian financial reforms





नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय जगत पर बड़ा प्रभाव डालने वाले कई बड़े फैसले लिए हैं. इनमें नोटबंदी कर देश में संचार हो रहे 86 फीसदी मुद्रा को बंद करना और उसकी जगह नई मुद्रा का संचार शुरू करना, वन नेशन वन टैक्स की परिकल्पना के तहत गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू करना और बैंकों का एनपीए संकट दूर करने के लिए सरकारी खजाने से लाखों करोड़ का भुगतान करना शामिल हैं. इसी क्रम में मोदी सरकार बैंकिंग व्यवस्था में एक और कानून बना रहा है जिसका व्यापक असर न सिर्फ बैंकों पर पड़ेगा बल्कि बैंक में बचत खाते में पैसा रखने वाला एक-एक ग्राहक इस कानून के दायरे में रहेगा और इस कानून से उसके लिए एक कभी न खत्म होने वाली 'परमानेंट नोटबंदी' का नया वित्तीय ढांचा खड़ा हो जाएगा.




केन्द्र सरकार फाइनेनशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) 2017 को जोरशोर से तैयार कर आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश करने जा रही है. संसद के दोनों सदनों में पुख्ता बहुमत के कारण यह बिल आसानी से पास होकर नया कानून भी बन जाएगा. इससे पहले इस बिल को केन्द्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया था और तब इसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास सुझाव के लिए भेज दिया गया था. अब एक बार फिर केन्द्र सरकार ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की सुझावों को देखते हुए नए बिल का प्रस्ताव संसद में पेश करेगी.




केन्द्र सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए कानून से दोनों सरकारी और प्राइवेट बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थाओं में दिवालियापन की समस्या से निपटने के लिए एक नया ढांचा तैयार किया जाएगा. केन्द्र सरकार का दावा है कि यह कानून देश में बैंकिंग और इंसॉल्वेंसी कोड, सरकारी बैंकों के रीकैपिटलाइजेश प्लान और इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की मंजूरी के बाद फाइनेनशियल सेक्टर का एक लैंडमार्क रिफॉर्म होगा.




केन्द्र सरकार के नए एफआरडीआई कानून से एक मौजूदा कानून डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन खत्म कर दिया जाएगा. मौजूदा समय में अलग-अलग बैंकों में जमा आपके पैसे की गारंटी इसी कानून से मिलती है. इस कानून में एक अहम प्रावधान कि किसी बैंक के बीमार होने की स्थिति में यदि उसे दिवालिया घोषित किया जाता है तो बैंक के ग्राहकों का एक लाख रुपये तक डिपॉजिट बैंक को वापस करना होगा. लिहाजा इसी कानून से देश की मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है.

इस सुरक्षित बैंकिंग व्यवस्था के चलते ही देश में बैंकों के ग्राहकों को बैंक में विश्वास कायम रहता है कि उनका पैसा कभी डूब नहीं सकता. किसी बैंक को दिवालिया करने पर भी सरकार ग्राहकों के डिपॉजिट की गारंटी इस कानून से देती है.




लेकिन नए कानून के जरिए प्रावधान किया जाएगा जहां यह धारणा पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. पूराने कानून को हटाते हुए वित्त मंत्रालय के अधीन एक नए रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन को स्थापित किया जाएगा. फिलहाल किसी बैंक की वित्तीय स्थिति का आंकलन करने और उसे वित्तीय संकट से बाहर निकलने की सलान देने का काम रिजर्व बैंक करता था. लेकिन एफआरडीआई कानून पास करने के बाद नया रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन इस काम को करने लगेगा.


फिलहाल देश में बैंक में वित्तीय संकट की स्थिति पैदा होने पर बैंको को बेलआउट पैकेज दिया जाता है. यह बेलआउट पैकेज केन्द्र सरकार अपने खजाने से देती है और कॉरपोरेट सेक्टर में गंदे कर्ज बांटकर बर्बाद हुआ बैंक इस बेलआउट पैकेज के सहारे दुबारा खड़े होने की कोशिश करता है. एफआरडीआई कानून के तहत प्रावधान किया गया है कि अब बेलआउट की जगह बैंक बेल-इन का सहारा ले सकेंगी.

लिहाजा, अब बैंकों के एनपीए की समस्या तीव्र होने पर नया रेजोल्यूशन कॉरपोरेशन यह तय करेगा कि बैंक में ग्राहकों के डिपॉजिट किए गए पैसे में ग्राहक कितना पैसा निकाल सकता है और कितना पैसा बैंक को उसका एनपीए पाटने के लिए दिया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर मौजूदा समय में बैंक में सेविंग खाते में पड़े आपके एक लाख रुपये को आप जब चाहें और जितना चाहें निकाल सकते हैं. लेकिन नया कानून आ जाने के बाद केन्द्र सरकार नए कॉरपोरेशन के जरिए तय करेगी कि आर्थिक संकट के समय में ग्राहकों को कितना पैसा निकालने की छूट दी जाए और उनकी बचत की कितनी रकम के जरिए बैंकों के गंदे कर्ज को पाटने का काम किया जाए.


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