संयुक्त राष्ट्र: अमेरिका ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को खारिज करने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक मसौदे प्रस्ताव पर वीटो कर दिया. सुरक्षा परिषद के 14 अन्य सभी सदस्यों ने प्रावधान का समर्थन किया. अमेरिकी राजदूत निक्की हेली द्वारा वीटो किया जाना अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम ले जाने के ट्रंप के फैसले पर वाशिंगटन का अलग-थलग पड़ता दिख रहा है.
सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में अमेरिका के मित्र देशों- ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान और यूक्रेन समेत 14 देशों ने प्रावधान का समर्थन करते हुए जोर दिया कि यरुशलम के दर्जे पर किसी भी फैसले का ''कानूनी प्रभाव नहीं है और यह निष्प्रभावी है.''
गौरतलब है कि 6 दिसंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी. जानकारों का मानना था कि ट्रंप के इस ऐलान का मध्य पूर्व एशिया में बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे. कहा जा रहा है कि यरुशलम के इजराइल की राजधानी बनने के बाद मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया तेज होगी और टिकाऊ समझौते के रास्ते खुलेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषणा से पहले जर्मनी के विदेश मंत्री ने अमेरिका को चेताया था कि येरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने पर क्षेत्र में तनाव बढ़ जाएगा. वहीं फिलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास की ओर से अमेरिका को इस फैसले के खतरनाक अंजाम की चेतावनी दी थी. वहीं, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ट्रंप की घोषणा को ‘‘गलत, अवैध, भड़काऊ एवं बेहद खतरनाक’’



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