खुल्लम - खुला
संजय त्रिपाठी
आज कल कुछ जयादा ही बदलाव का बयार बह रहा है। कड़ाके की ठंढ में बयार शीतलहर बन गई है, जो शरीर पर प्रभाव तो डालती है, जिससे शरीर में कंपन के साथ जुबान में भी कंपन आ जाता है। जब भी इस शीत लहर के प्रकोप में हम बोलते है तो जुबन कंपन के कारण अपनी आवज को कुछ के जगह कुछ निकालने के लिए मजबूर हो जाती है। हम चाहते तो हमेशा यही है कि हमारे जुबान से निकले हुए शब्द लोगों पर जादू सा काम करें। जैसे मोदी के शब्द आज कल कर रहे है। लेकिन ठंढ के कारण वह बहक जाता है और जुबान से कुछ अलग ही निकल जाता है। अभी पांच दिन पहले भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री के जुबान से शीत लहर के प्रभाव के कारण ‘ संविधान बदलने ’ की बात निकल गई थी। हालांकि उन्होंने माफी भी मांग लिया, लेकिन इस बदलाव के बयार के कारण दो दिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसद नारे लगाने का काम करते रहे। इससे पहले दोनों सदनों में गुजरात में फिसले जुबान के कारण ही हंगामा होता रहा। जब इसे किसी तरह खत्म किया गया तो संविधान बदलने के मुद्दें पर हंगामा होने लगा । असल में हम लोग आर्यो के बंशज हैं, हमारे फितरत में ही हंगामा करना है। कभी सड़क पर तो कभी सांसद और विधानसभा में तो कभी अपने घर में। इससे होने वाला बदलाव में निखार और नयापन होता है। कवि और साहित्यकारों का मानना है कि नायक - नायिका में प्यार और ज्यादा उमड़ता है, जब दोनों में तकरार होता है। बिहारी ने कहा भी है -
कहत, नटत, रीझत, खीझत, मिलत, खीलत, लजियात।
भरे, भौन में करत हैं, नैनन ही सो बात।।
बदलाव पर तो खुश होना चाहिए, लेकिन यहां तो संविधान बदलने की बात पर हंगामा ही वरप पड़ा। तीन तलाक पर 1400 वर्ष पुरानी परंपरा को बदल कर लोग कितना खुश हो रहे है, और दूसरी तरफ बदलाव पर आकाश सर पर उठाने को तैयार है। आखिर मोदी सरकार सब कुछ में बदलाव ही कर रही है। तीन साल में कितना बदलाव हुआ है, अगर इसे गिनने लगे तो शायद तीन साल भी कम पड़ जायेगा। हमें भी अपनी जवानी का वह दिन याद आता है, जब मैं भी एक कालोनी और समाज बदलने चला था। उस समय एक जोश था, एक उम्मीद था, एक विश्वास था कि मैं आजाद भारत में गुलाम मानसिकता को बदल दूंगा। 11 वीं कक्षा में पढ़ते हुए सन् 1984 में अपने पिता के खिलाफ जन वितरण प्रणाली की दुकान में आनाज गबन का शिकायत किया था। इस शिकायत के कारण उस समय मेरे पिताजी को करीब 15 हजार रूपए की चोट लगी थी। देश में बदलाव की बयार ने ही मुझे गाजियाबाद में लाकर पटक दिया। जहां अपना कार्य क्षेत्र बनाया वहां के लोगों को बदलने के लिए दिन - रात मेहनत किया, लेकिन लोगों को तो मैं बदल नहीं पाया, खुद बदल गया। भाजपा के और केंद्रीय मंत्री भी बदलने की सलाह देते है, साथ ही बदल जाने पर गोली से उड़ा देने की बात भी करते है। ये बदलाव वाले मंत्री हैं हंसराज अहीर। इनका कहना है कि नाराज डाॅक्टर्स नक्सल समूह में शामिल हो जाएं, फिर सरकार उन्हें गोली मार देगी। ऐसे बदलाव हो रहे है। योगी जी भी प्रदेश में बहुत बदलाव कर रहे है। 14 जनवरी खीचड़ी के बाद मंत्रीमंडल में बदलाव तथा विस्तार दोनों किया जायेगा। साहिबाबाद विधायक भी इस विस्तार में शामिल हो सकते है। गाजियाबाद के नगर अध्यक्ष का बदलाव साल बदलने से पहले ही कर दिया गया। कांग्रेस के युवराज भी बदल गये है, और अपनी चैकड़ी में भी भारी बदलाव करने वाले है। ऐसे बदलाव में चम्मचों को बहार और लोगों को बदलाव का बयार जरूर नए वर्ष में सुमंगल करेगा ।



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