केजरीवाल की घूस संबंधी टिप्पणी को लेकर नोटिस जारी - goa court issue notice to arvind kejriwal on bribe comment




पणजीः गोवा की एक स्थानीय अदालत ने गत वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घूस संबंधी टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ दायर एक मामले में उन्हें नोटिस जारी किया है. मापुसा के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आप नेता को शुक्रवार को नोटिस जारी किया तथा मामले पर अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की.

निर्वाचन आयोग ने जनवरी 2017 में पुलिस को केजरीवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे. केजरीवाल ने सार्वजनिक तौर पर मतदाताओं से अपील की थी कि वे गोवा चुनावों के दौरान विरोधी दलों द्वारा उन्हें वोट देने के बदले में दी जाने वाली घूस ले लें. गोवा में पिछले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव हुए थे. निर्वाचन आयोग के स्थानीय अधिकारियों ने मापुसा थाने में केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.



गौरतलब है कि चुनाव आयोग (ईसी) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गोवा की एक चुनावी सभा में पैसे लेने संबंधी बयान देने को लेकर फटकार लगायी थी और कहा कि यदि वह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन जारी रखते हैं तो उनके और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी जिसमें आप की मान्यता को निलंबित करना या वापस लेना भी शामिल होगा.

EC ने 16 जनवरी 2017 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था
चुनाव आयोग ने केजरीवाल को 16 जनवरी 2017 को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए चुनाव आयेाग ने उन्हें एक चुनाव रैली में यह कहते हुए उद्धृत किया था कि कांग्रेस और भाजपा पैसा बांटने आएंगी, लोगों को नये नोटो में उसे ले लेना चाहिए, यहां तक कि उन्हें महंगाई को ध्यान में रखकर 5000 रुपये के बजाय 10,000 रुपये मांगना चाहिए लेकिन वोट ‘आप’ को ही देना चाहिए.


आयोग के आदेश पर केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘मेरे विरूद्ध चुनाव आयोग का आदेश पूरी तरह गलत है. निचली अदालत ने मेरे पक्ष में आदेश दिया. ईसी ने अदालत के आदेश की अनदेखी की. आयोग के इस आदेश को अदालत में चुनौती दूंगा.’

चुनाव पैनल केा भेजे जवाब में केजरीवाल ने ऐसा बयान देने से इनकार किया था और कहा था कि उन्होंने किसी भी मतदाता को किसी रिश्वत की न तो पेशकश की और न ही मतदाताओं को किसी अन्य व्यक्ति से कोई मौद्रिक लाभ लेने के लिए बहकाया. उन्होंने कहा कि उनके बयान में ऐसा कुछ नहीं है जिसे मतलब रिश्वतखोरी को बढ़ावा देना माना जाए या फिर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन समझा जाए.


लेकिन चुनाव आयोग ने उनके इस रुख को खारिज कर दिया और याद किया कि उन्हें ऐसा ही बयान देने पर 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसी ही चेतावनी दी गयी थी. ईसी ने कहा कि उसे इस बात से पीड़ा हुई है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं अपनी पार्टी के स्टार प्रचारक होने के नाते आप से चुनाव अभियानों में कानून का पालन कर ऐसे शोभनीय आचरण की आशा की जाती है जिसका अन्य अनुकरण करें, लेकिन आपने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग को दिये गये अपने आश्वासन को तोड़कर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है.

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