वसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता ) केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के पूर्व मुख्य आयुक्त अशोक आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बड़े प्रणेता थे। उन्होंने लोगों को हमेशा कहा कि वे गुण-कर्म अनुसार चलें। जातिगत आधार पर आरक्षण के स्वामी दयानंद घोर विरोधी थे।
मेवाड़ संस्थान में आयोजित एक समारोह में उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने विदेशियों के राज से स्वराज्य को उत्तम माना। उनका लिखा सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ सूर्य के प्रकाश के समान है। आज महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं को अपनाकर देशभर से जातिगत विवादों व पाखंडों को नष्ट किया जा सकता है। मेवाड़ ग्रुप के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि महर्षि दयानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। इन्हें अमल में लाना होगा। इन्हें अमल में लाने पर ही विश्व में व्याप्त तमाम विवादों और पाखंडों से बचा जा सकता है। वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना के समय महर्षि दयानंद ने हरिद्वार में पाखंड खंडिनी पताका फहरा़कर सभी विद्वानों को शास्त्रार्थ की चुनौती दी। इसमें उन्होंने तमाम अंध विश्वासों व विरोधों को समाप्त कर स्त्री शिक्षा पर जोर दिया। वर्ण व्यवस्था, अंधविश्वास, रुढ़ परम्परा, लोभ, मोह आदि का त्याग करने की बात कही। डाॅ. गदिया ने कहा कि स्वामी दयानंद महिलाओं के विकास के प्रबल पक्षधर थे। .
समारोह की शुरुआत मां सरस्वती, भारत माता व दयानंद सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर व पुष्प अर्पित करके हुई। इस मौके पर विद्यार्थियों ने गायत्री मंत्र, यज्ञ प्रार्थना, भजन, समूह गान, सम्भाषण, आर्य समाज के नियम, दयानंद के प्रवचन, कविताएं आदि प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थी थे-निशांत राव, सृष्टि राना, जयश्री, शिवानी, आराधना, शिखा, शिवा, यशस्वी, वंदना, अश्विनी पटेल, रिजवान, हर्षिता आदि। इस मौके पर मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल समेत तमाम शिक्षण स्टाफ मौजूद था। संचालन प्रशांत जिंदल व अखंड प्रताप ने किया।



0 comments:
Post a Comment