रेलवे के मुम्बई मंडल में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के समस्त प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश Recommend to conduct CBI probe in all the cases of 'first come, first serve' in the Mumbai division of Railways



नयी दिल्ली,   (भाषा)  संसद की लोक लेखा समिति ने मुम्बई मंडल के पश्चिमी रेलवे में ‘‘ पहले आओ, पहले पाओ’’ सेवा के आधार पर आवंटित विज्ञापनों के सभी ठेकों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने और मुम्बई मंडल में पश्चिम एवं मध्य रेलवे में इस नीति के समस्त प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश दोहरायी।

लोकसभा में आज पेश ‘‘भारतीय रेल में वाणिज्यिक प्रचार’’ विषय पर लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर विज्ञापनों हेतु ठेके प्रदान करने में पारदर्शिता के अभाव के मद्देनजर समिति ने सभी ठेकों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की सिफारिश की थी ।

मध्य रेलवे में इनके तात्कालिक लाइसेंसधारक बम्बई उच्च न्यायालय गये थे । रेलवे ने उक्त सभी ठेकों को समाप्त कर दिया था । ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर कोई नये ठेके प्रदान नहीं किये जा रहे और अब ई नीलामी टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति यह चाहती है कि ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति से संबंधित सभी प्रकरण की व्यापक जांच करनी चाहिए और कार्रवाई से समिति को अवगत कराया जाना चाहिए ।

समिति यह जानकर आश्चर्यचकित है कि मुम्बई मंडल में मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे में इस नीति के आधार पर आबंटित सभी ठेकों को समाप्त करने की सिफारिश के बावजूद केवल मध्य रेलवे में ही कार्रवाई की गई और पश्चिम रेलवे में कार्रवाई नहीं की गई ।

समिति मंत्रालय के उत्तर से संतुष्ट नहीं है कि रेलवे के सतर्कता निदेशालय को सीवीसी के मार्गदर्शन के तहत लोक लेखा समिति द्वारा उठाये गए मुद्दों की विस्तृत जांच करनी चाहिए।

समिति यह नोट करके चिंतित है कि शिकायत प्राप्त होने के साढ़े तीन साल गुजर जाने के बाद भी मंत्रालय 10 आरोपी अधिकारियों में से छह के विरूद्ध ही कार्रवाई कर सका । शेष के बारे में दलील दी गई है कि उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई अनुशासन प्राधिकारी द्वारा की जा रही है ।

समिति अपनी सिफारिश दोहराती है कि मुम्बई मंडल के पश्चिमी रेलवे में ‘‘ पहले आओ, पहले पाओ’’ सेवा के आधार पर आवंटित विज्ञापनों के सभी ठेकों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने और मुम्बई मंडल में पश्चिम एवं मध्य रेलवे में इस नीति के समस्त प्रकरण की सीबीआई जांच करायी जाए ।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसे दोषपूर्ण ठेकेदारों को भविष्य के ठेकों से अलग कर दिया जाए और चेतावनी की सूची में डाल दिया जाए । भाषा दीपक वैभव



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