अम्बेडकर विश्वविद्यालय का कट-ऑफ भेदभावपूर्ण, केवाईएस ने जलाया कट-ऑफ Ambedkar University's Cut Off Discrimination, KYS Burns Cut Off



  • ऊँची कट-ऑफ से सरकारी स्कूल के छात्रों का एयूडी में प्रवेश हुआ निषेध
  • दिल्लीवासी छात्रों के लिये 85% कोटे का प्रस्ताव होने पर भी सरकारी स्कूल के छात्र विश्वविद्यालय से बाहर
  • केवाईएस ने प्रवेश परीक्षा हिंदी में भी कराए जाने की मांग उठायी



नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओ ने भारी संख्या में मौजूद सरकारी स्कूल के छात्रो के साथ अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कश्मीरी गेट स्थित कैंपस के मैन गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया| छात्रो का यह प्रदर्शन दिल्ली सरकार द्वारा वित्त-पोषित अंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) प्रशासन द्वारा निकाली गयी ऊँची कट-ऑफ के खिलाफ था| छात्रो ने प्रदर्शन के दौरान विरोध-स्वरुप विश्विद्यालय द्वारा निकाले गए कट-ऑफ की एक प्रति भी जलायी| ज्ञात हो कि हर साल एयूडी में ऊँची कट-ऑफ निकाली जाती है| इतने ऊँचे कट-ऑफ से सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय में एडमिशन ले पाना नामुमकिन होगा| ज्ञात हो कि एयूडी में पहले से ही दिल्ली के छात्रों के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण है, किन्तु किसी भी सरकारी स्कूल के छात्र का यहाँ एडमिशन ले पाना नामुमकिन है| दिल्ली से 12वीं पास करने वाले छात्रों में ज्यादातर दिल्ली के सरकारी स्कूल के छात्र होते हैं, जिन्हें खराब पढ़ाई के कारण अच्छे अंक नहीं आ पाते हैं| इसके बावजूद इतना ऊँचा कट-ऑफ निकालना दिखाता है कि सीट दिल्ली के महंगे प्राइवेट स्कूलों से पढ़कर आये छात्रों को ही मिलेगी| यह साफ़ तौर पर साबित करता है कि आप सरकार शिक्षा में गैर-बराबरी को खत्म करने की जगह सिर्फ झूठे मुद्दे उठाकर दिल्ली की जनता को भटकाना चाहती है|

ज्ञात हो कि विश्वविद्यालय द्वारा वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ भेदभाव यहीं नहीं खत्म होता| इस विश्वविद्यालय में प्रवेश के इच्छुक छात्रो का एक बड़ा हिस्सा सरकारी स्कूलों से पढ़कर आता है, जहां हिंदी माध्यम में पढाई होती है| परन्तु विश्वविद्यालय अंग्रेजी माध्यम में ही प्रवेश परीक्षा कराता है जिसके कारण हिंदी माध्यम के छात्र प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाते है| यह पूर्ण रूप से प्रशासन का वंचित छात्रों के प्रति असंवेदनशील और भेदभावपूर्ण रवैया दिखाता है| साथ ही, विश्वविद्यालय में जो छात्र पहुँच भी पाते हैं, उनसे इतनी महंगी फीस वसूली जाती है कि वो एडमिशन नहीं लेने या बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होते हैं| ज्ञात हो कि एयूडी छात्रों से 40,000 से 1,34,000 सालाना फीस लेता है, जो अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों से कई गुना ज्यादा है| ज्ञात हो कि दिल्ली सरकार ने अन्य सरकारी कॉलेज खोलने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है, परन्तु इन तरीकों द्वारा वंचित छात्रों को पढ़ाई से दूर करने के सारे उपाय कर रही है|

केवाईएस एयूडी प्रशाशन के इस सरकारी स्कूल छात्र विरोधी रवैये की कड़ी आलोचना करता है| प्रदर्शन के दौरान छात्रो के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौपा गया जिसमे जिसमे कट-ऑफ के साथ अत्यधिक फीस कम करने तथा प्रवेश परीक्षा हिन्दी में भी कराने की मांग की गयी| साथ ही, सभी छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने की मांग को भी उठाया गया, ताकि वो बीच में पढ़ाई छोड़ने को मजबूर न हों| केवाईएस का मानना है कि सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में सरकारी स्कूल के  छात्रों का पहला अधिकार है|  इस तौर पर केवाईएस मांग करता है कि एयूडी में सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 10% अक्षमता निवारक रियायत अंक (डेप्रीवेशन पॉइंट्स) का प्रावधान किया जाये और सभी तक अच्छी उच्च शिक्षा पहुचने के लिए नए कॉलेज खोले जाए|




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