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| संजय त्रिपाठी |
पाकिस्तान में तहरीके इंसाफ पार्टी पीटीआई का सत्ता पर काबिज होना एक बहुत बड़े सियासी बदलाव माना जा रहा है। इसके मुखिया इमरान खान हालांकि सबसे बड़े दल के रूप में उभरे तो हैं, लेकिन पूर्ण बहुमत से दूर है। फिर भी पाििकस्तान में सत्ता के कप्तान के रूप में अपना पहला प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हिन्दुस्तान के लिए बहुत कुछ दर्शा दिया। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में जैसा सियासी माहौल बन गया था, उसमें पहले से संकेत मिलने लगा था कि वहां के लोग इस चुनाव में किसी दमदार विकल्प को चुनेंगे। यह कयास पहले से ही लगाया जा रहा था कि इस चुनाव में इमरान कि जीत निश्चित है, और हुई भी, क्योंकि वहां कि फौज इस चुनाव में इमरान का खूल कर साथ दे रही थी। इस मुल्क की फौज ने जो तहरीर उनकी पार्टी को हुकूमत में लाने के लिए चुनावों से पहले ही लिख दी थी उसी के अनुसार चुनाव नतीजे आये हैं। यही वजह है कि इस मुल्क की पुरानी सत्तारूढ़ पार्टी मुस्लिम लीग से लेकर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने मतों की गिनती में धांधली का आरोप लगाया है। इस मुल्क की सेना ही यहां के सियासत को तय करती है। इसके पीछे सेना की सबसे बड़ी मकसद हिन्दुस्तान के साथ हमेशा से ही दुश्मनी का वातावरण बनाये रखने से ही उनको वहां के आवाम से हमदर्दी मिलती रहती है। जिस शासक ने हिन्दुस्तान से दोस्ताना व्यवहार बनाने तथा आवाम को दोनों देशों के रिश्ते मधुर करने के लिए जागरूक करने का काम किया उसे वहां की फौज हमेशा के लिए जमींदोज करने पर उतारू हो जाती है। एक नजर हम पीछे के उन हुक्मरानों पर डालते हैं, जिन्होंने हिन्दुस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाया और किसी न किसी सियासी चाल में फंस कर हमेशा के लिए गारत हो गए। यह पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि जब भी कोई सियासतदां इस मुल्क में अवाम की नजरों में चढ़ जाता है तो फौज उसे दागदार बनाकर या तो सलाखों के पीछे भेज देती है या फिर उसे इस दुनिया से ही विदा कर देती है। पिछले सत्तर सालों में अभी तक इस मुल्क के सबसे अजीज नेता जुल्फिकार अली भुट्टो हुए और उन्हें फौज ने जिस तरह 1978 में हुकूमत से बेदखल करते हुए जेल में डाल कर अदालत के जरिये फांसी की सजा सुनवाई थी वह मामला पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में अकेला था। इसके बाद जिस तरह 2008 में उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो की हत्या चुनावी प्रक्रिया के दौरान जनरल परवेज मुशर्रफ के हुकूमत में रहते की गई उसने पाकिस्तान में लोकतन्त्र लाने की फौज की नीयत को साफ कर दिया था। इसकी वजह यही थी कि भुट्टो की पीपुल्स पार्टी इस्लामी पाकिस्तान की सबसे बड़ी नरमपंथी और समाजवादी विचारों की तरफ झुकी हुई ऐसी पार्टी थी जो इस मुल्क को दहशतगर्दी का अड्डा बनने से रोकने के लिए अवाम में जागरूकता लाना चाहती थी । आज सबके सामने है मियां नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग पार्टी राष्ट्रवादी तमगे के बावजूद भारत के साथ ताल्लुकात सुधारना चाहती थी और इस तरफ नवाज शरीफ ने हुकूमत में रहते हुए ईमानदार कोशिशें भी कीं। वे सेना पर आरोप लगाते हुए खुद को बेदाग साबित करने की कोशिश करते रहे और उन्हें उम्मीद थी कि लोग अपने वोटों से उन्हें इंसाफ दिलाएंगे, पर वह उनकी गलतफहमी साबित हुई। फौज ने इस बार सबसे अलग हट कर इमरान खान के पार्टी को पीछे के पर्दे से हर संभव चुनाव जीताने में मदद की तथा पार्टी का खड़ा करने में भी पूरा सहयोग दिया। वहां की फौज कभी भी लोकतांत्रिका ढांचे से सरकार चलाने के पक्षधर ही नहीं रही है। अपने चुनाव प्रचार के दौरान इमरान खान ने भारत विरोध को मुद्दा बनाते हुए भ्रष्टाचार को केन्द्र में रखकर यहां की अवाम की हिमायत पाने के लिए जो मेहनत की उससे फौज का पूरा समर्थन भी उन्हें मिला। अपनी कई चुनावी रैलियों में उन्होंने मोदी का कई बार जिक्र किया, यहां तक कि सत्ता का कप्तान बनते ही आवाम के संबोधन में तीन बार चीन का नाम लेते हुए उसे सबसे गहरा दास्त बताया। कई देशों से अपने संपर्क और विदेश नीति तथा रक्षा नीति की चर्चा करने के बाद हिन्दुस्तान से संबंध मधुर करने पर जोर दिया। भारत के साथ सारे मसले बातचीत से सुलझाने की वकालत करते हुए कहा कि अगर हिन्दोस्तान एक कदम आगे चलेगा तो मैं दो कदम आगे चलूंगा। इसमें उन्होंने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और बातचीत से इसे हल करने पर जोर भी दिया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने सबसे ज्यादा तारीफ चीन की करते हुए कहा कि उसकी ‘सी पैक’ परियोजना से पाकिस्तान को लाभ होगा और इसके लोगों को रोजगार भी मिलेगा, यह एक तरह से भारत को बताना था कि हमारा सारा फोकस चीन के तरफ है। पाकिस्तान की फौज भी यही चाहती है। इमरान के अब तक भारत विरोधी रवैया को देखते हुए तथा फौज के साया में होने के कारण हिन्दुस्तान से संबंध मधुर होने के वजाय और ज्यादा बिगड़ने की संभावना ही दिखाई दे रही है। शायद इमरान के शासन में पाकिस्तान के आवाम को और ज्यादा फौजी तथा आतंक के दहसतगर्दी में जीना पड़ सकता है।




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