डाक घर अब ‘शो पीस’ बन कर रह गया Post office is now becoming a 'show piece'




गाजियाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  गाजियाबाद जिला में अब डाक घर सिर्फ ‘शो पीस ’ बन कर रह गया है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में चिट्ठी छोड़ने, मनिआर्डर करने, रजिस्ट्री करने वाले लोगों को मन मान कर डाक घर से वापस लौटना पड़ रहा है। 
21 वीं सदी में जिस तरह से डाक घर को आम नागरिक के लिए सुविधा सुलभ बनाया जा रहा है, उसी तरह अब लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग पूरे जिले के सभी डाक घरों से मायुस वापस लौटने के लिए मजबूर हो रहे है। डाक घर में कार्यरत कर्मचारी की आम जनता से अडत्रे ही बेरूखी शब्दों में बात करते है, वहीं फिलहाल इस जिले में एक पत्र को भेजपाना भी मुश्किल है। जिले के किसी भी डाक घर में एक रूपए की एक भी टिकट नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं रजिस्ट्री, मनिआर्डर करने के लिए लोग दिन - दिन भर लाईन में लग रहे है, फिर भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। जहां केंद्र सरकार सभी डाक घरों को आधुनिक बनाने का दावा कर रहा है, वहीं भाई - बहनों के प्यार का ऐ मात्र त्योहर रक्षा - बंधन पर टिकट की उपलब्धता न होने के कारण बहनों को दूर - दराज में अपने भाई के पास राखी भेजने के लिए कोरियर कंपनियों का सहारा लेना पड़ रहा है। 
जिले के मुख्य डाक घर राज नगर में भी पिछले तीन माह से डाक टिकट नहीं मिल रहे है। वहां बड़ी ही बेरूखी से आम जनता को टिकट नहीं है कह कर टरका दिया जाता है। मोहन नगर डाक घर में तो टिकट के नाम पर वहां कार्यरत कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार ही नहीं है। कई बार पूछने पर कांउंटर पर बैठा एक कर्मचारी चिल्ली कर बोलता है, टिकट नहीं है तो क्या बताऊं। कई बार तो यहां काम कराने के लिए लोगों को कर्मचारियों झड़प् तक हो जाती है। कई अखबारों के संपादकों को अपनी प्रकाशित काॅपी दूसरे राज्यों में भेजने के इस समय लाले पड़े हुए है। सप्ताहिक अखबार सर्वोदय शांतिदूत के पिछले दो माह के सभी अंक टिकट न मिलने के कारण फोल्ड कर आॅफिस में रख हुआ है। आप सोच सकते हैं कि डाक घर आधुनिक तो होता जा रहा है, लेकिन अपने मुख्य काम से ही कटता जा रहा है। केंद्र सरकार को शीध्र इस तरफ भी सोचना चाहिए।  


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