खेतिहर मजदूरों की मांगों को मौजूदा किसान आन्दोलन से स्वतंत्र करने की मांग उठायी
‘ज़मीन जोतने वाले की ज़मीन’ नीति को तुरंत पारित कर सख्ती से लागू करने की भी उठाई मांग
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने आज संसद मार्ग पर आयोजित किसान-मजदूर विरोध मार्च को सशर्त देता है| ज्ञात हो कि विरोध मार्च में हिस्सा लेने देश के कई प्रदेशों से किसान और मजदूर आये हैं, जिनमे खेतिहर (भूमिहीन) मजदूर और असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी शामिल है| यह आश्चर्यजनक बात है कि जहाँ किसानों और संगठित क्षेत्रों के मजदूरों की मांगों को मांगपत्र में मुख्यतः से शामिल किया गया है, वहीं खेतिहर मजदूरों और असंगठित मजदूरों की मांगों को सिर्फ़ नाममात्र के लिए जोड़ा गया है| इन मांगों में बहुत सी माँगें अंतर्विरोधी हैं, जो अमीर किसानों को तो काफी फायदा पहुंचाती हैं, परन्तु उलटे खेतिहर मजदूरों और असंगठित मजदूरों को नुक्सान पहुंचाती हैं| आन्दोलनरत किसानों की मुख्य मांगों में स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू किया जाना, जिसमे उत्पादन मूल्य का डेढ़ गुना किसानों को अदा करने की मांग शामिल है| यह माँग अमीर किसानों को तो फायदा पहुंचाएगी परन्तु मूल्य बढ़ोत्तरी के कारण खेतिहर और असंगठित मजदूरों पर बुरा असर डालेगी|
ज्ञात हो कि देश में छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों, जो कि खेतिहर समाज में बहुसंख्यक आबादी हैं, की स्थिति काफी बदतर है| इनकी मांगों को प्राथमिक बनाने की जगह विरोध मार्च में उन मुद्दों को उठाया गया जो सम्पन्न किसानों को हित पहुंचाते हैं| केवाईएस माँग करता है कि खेतिहर मजदूरों के आन्दोलन को मौजूदा किसानों के आन्दोलन से स्वतंत्र किया जाए, क्योंकि उनकी मांगें किसानों के प्रभावशाली हिस्से की मांगों के पिछलग्गू रहती है, और जिससे अंततः सिर्फ़ अमीर किसानों को ही फायदा होता है| खेतिहर समाज के अमीर हिस्से की मांगों को खेतिहर समाज के गरीब तबके की मांगों से पृथक देखने और उठाने की ज़रुरत है, क्योंकि अमीर तबके की मांगें बहुसंख्यक मेहनतकश जनता के विरुद्ध हैं| साथ ही, केवाईएस यह माँग करता है कि सरकार को ‘ज़मीन जोतने वाले के नाम ज़मीन’ नीति को पारित कर सख्ती से लागू करना चाहिए|
केवाईएस किसान-मजदूर विरोध मार्च को सशर्त समर्थन देता है और उसकी सभी राज्य इकाइयाँ उनके समर्थन में और छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों के शोषित तबके के मुद्दों को आगे लाने के लिए संघर्ष आरम्भ करेंगे|



0 comments:
Post a Comment