- निजीकरण से मेट्रो कर्मचारियों के शोषण में होगी बढ़ोत्तरी
- मेट्रो किराये में भारी बढ़ोत्तरी का होगा रास्ता साफ
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) दिल्ली मेट्रो कम्यूटर्स एसोसिएशन (डी.एम.सी.ए) हाल में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डी.एम.आर.सी) द्वारा मेट्रो की दो लाइनों का कार्य निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की कड़ी निंदा करता है। यह निर्णय मेट्रो रेल पालिसी के तहत लिया गया है जिसे केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों मंत्रालय द्वारा लाया गया है।
इस पालिसी के तहत केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए निजी कंपनियों को मेट्रो के संचालन और रखरखाव में संलग्न करना जरूरी है। निजी हाथों में मेट्रो कार्य सौंपना, सरकार के सार्वजनिक उपयोगिताओं को सार्वजनिक हित से हटाकर निजी मुनाफे का रास्ता बनाने की योजना का हिस्सा है। ज्ञात हो कि यह फैसला पिछले साल मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी के बाद लिया गया है। मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी से बड़ी संख्या में यात्रियों को मेट्रो की यात्रा छोड़नी पड़ी थी और इस कारण दिल्ली की एक बड़ी आबादी को बहुत समस्या हुई थी।
साथ ही यह भी विदित हो कि डी.एम.आर.सी को अपने कर्मचारियों का शोषण करने और के लिए जाना जाता है जहाँ बिना न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित किये उनसे लम्बे घंटे काम कराया जाता है। अब निजी कंपनियों के आने के बाद मेट्रो कर्मचारियों के शोषण में और भी ज्यादा वृद्धि सुनिश्चित होगी। इसी सन्दर्भ में ज्ञात हो कि पिछले साल मेट्रो के नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों अपने शोषणकारी वेतन में बढ़ोत्तरी की माँग को लेकर आंदोलनरत रहे हैं।
साथ ही, मेट्रो कार्यों का निजीकरण किये जाने से मेट्रो किराए में भी बड़ी बढ़ोत्तरी किये जाने का रास्ता सुलभ किया जा रहा है। निजी कम्पनियाँ दिल्ली मेट्रो को सस्ता और सुविधाजनक परिवहन सार्वजनिक हित के लिए मुहैया करने के लिए नहीं बल्कि अपने निजी मुनाफे के लिए चलाएंगी, जिससे सबसे पहला असर किराया बढ़ोत्तरी होगी। डी.एम.सी.ए. का मानना है कि मेट्रो सम्बंधित कोई भी निर्णय बिना यात्रियों से विमर्श किये नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कोई भी निर्णय सबसे ज्यादा उन्हें ही प्रभावित करेगा। डी.एम.सी.ए. आने वाले दिनों में दिल्ली मेट्रो के निजीकरण के खिलाफ अपना आन्दोलन तेज करेगा। यह जानकारी डीएमसीए के संयोजक भीम तिवारी ने दी है।



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