- उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के लिए अन्य दलों के नेताओं का दबाव
- मायावती से मिले अखिलेश, कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, ( संजय त्रिपाठी ) उत्तर प्रदेश में सपा - बसपा का गठबंधन अधूरा माना जा रहा है। दूसरे अन्य दलों के नेताओं ने मोदी को सत्ता से दूर करने के लिए कांग्रेस के मुखिया राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ अन्य नेताओं पर गठबंधन में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे है। वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और महासचिव राम गोपाल यादव के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी कांग्रेस को सम्मानजनक सीट देने के लिए तैयार करने में लगे है।
सोमवार को राम गोपाल यादव और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच करीब डेढ़ घंटे तक इन्हीं मुद्दों पर चर्चा हुई है। सपा के एक बरिष्ठ नेता का कहना है कि चन्द्रबाबू नायडू, लालू यादव जैसे नेताओं का मोदी को सत्ता से बाहर करने को लेकर सबसे ज्यादा दबाव है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने प्रदेश में खुफिया स्तर से सर्वे कराया है उसमें भी स्पष्ट संकेत मिला है कि गठबंधन की जीत तभी पक्की हो सकती है जब कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किया जायेगा।
उधर बसपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 25 सीटों की मांग कर रही थी। सपा - बसपा दोनों दल अपने - अपने सीट का बंटवारा कर लिए है। कांग्रेस का दो मुख्य सीट अमेठी और रायबरेली से दोनों पार्टियों ने अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा हैं। इधर आरएलडी को सपा तीन अपनी सीट देकर गठबंधन में शामिल की है। ऐसे में कांग्रेस को अब गठबंधन में शामिल करने के लिए कितना और किस तरह सीट दी जाय, दोनों के बीच यही पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि अभी दोनों र्पािर्टयों के मध्यस्था करने वाले नेताओं ने कांग्रेस को 12 सीट देने का आॅफर दिया है। लेकिन कांग्रेस 18 सीट पर अड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दो - तीन दिन में फैसला हो जायेगा।
हालांकि मंगलवार को मायावती ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने से साफ इंकार कर दिया था।
इधर बुधवार को कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की मेरठ में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर से मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद अखिलेश ने मायावती से भेंट की है ।



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