- लोगों पर पुलिसिया बर्बरता और सार्वजनिक अस्पतालों में ओपीडी बंद होने के मुद्दे उठाए
- पुलिसिया बर्बरता पर कार्रवाई और अस्पतालों के ओपीडी तुरंत खोलने की अपील की
सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो
नई दिल्ली । क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने आज कोरोना वायरस महामारी को लेकर कई मुद्दों और इससे लड़ने के लिए तैयारी को लेकर भारत के राष्ट्रपति को एक खुला पत्र लिखा। इस पत्र में सबसे महत्त्वपूर्ण दो मुद्दों को उठाया गया, आम जनता पर पुलिसिया बर्बरता और देश भर के सार्वजनिक अस्पतालों में बाह्य-रोगी विभागों (ओपीडी) का बंद किया जाना। पत्र में अन्य गंभीर मुद्दों को भी उठाया गया जिसमें सड़कों पर फंसे प्रवासी मजदूर, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरणों की कमी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति, इत्यादि शामिल थे।
ज्ञात हो कि पुलिस द्वारा फंसे हुए कामगारों को बेरहमी से पीटना और उनपर कीटाणुनाशक का छिड़काव करने की बहुत सारी रिपोर्टें मौजूद हैं। साथ ही, देश भर में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें मास्क नहीं पहनने और आवश्यक कामों के लिए बाहर निकलने जैसे साधारण बातों को लेकर पुलिसकर्मी आम जनता की दर्दनाक पिटाई कर रही हैं। पुलिसकर्मियों की बर्बरता के कारण शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित हो कर एक दलित कामगार ने पिछले दिनों आत्महत्या कर ली थी। लॉकडाउन के उपायों को कार्यान्वयन के नाम पर आम जनता के प्रति पुलिस और प्रशासन का इस तरह का निर्दयी व्यवहार करना बहुत ही आम हो गया है।
देश भर के विभिन्न सार्वजनिक अस्पतालों में बाह्य-रोगी विभागों (ओपीडी) को बंद करने का मामला बहुत गंभीर है। ज्ञात हो कि देश भर में सार्वजनिक अस्पतालों में ऑपरेशन, सर्जरी, इलाज, इलाज बंद कर दिया गया है ताकि कोरोना वायरस पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। ओपीडी बंद होने के कारण लॉकडाउन के समाप्त होने तक आम जनता को विभिन्न बीमारियों के लिए अपना इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ज्ञात हो कि भारत क्षय रोग (टीबी) जैसे कई संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों का केंद्र है, जिनके कारण हर साल लाखों लोगों की जान जाती है। कोरोना (कोविद -19) महामारी के साथ-साथ ये बीमारियां भी लगातार लोगों को ग्रसित कर रही हैं और ओपीडी के बंद होने से ऐसे कई लोगों की मौत की संभावना है, जो कोरोना वायरस के संपर्क में आये ही न हों।
इन सभी मुद्दों को उठाते हुए केवाईएस ने राष्ट्रपति से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सार्वजनिक अस्पतालों की ओपीडी तुरंत खोली जाएँ, ताकि आम कामकाजी जनता का इलाज सुनिश्चित हो सके। साथ ही यह अपील भी करता है कि लॉकडाउन के उपायों को लागू करने के नाम पर जिन पुलिसकर्मियों को पर प्रवासी कामगारों और आम जनता को परेशान करते हुए पाया गया है, उनपर सख्त कार्रवाई की जाए।



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