नई दिल्ली,विशेष संवाददाता
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के सभी प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि मोदी को क्रमिक विकास नहीं बल्कि कायाकल्प चाहिए, इसलिए सिर्फ अच्छा नहीं सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन करें । उन्हें जिम्मेदारी दे दी गई है कि विकास और जनकल्याण की गाड़ी को खींचने में उन्हें ही सबसे आगे खड़ा होना पड़ेगा। मकसद विकास भी है और राजनीति भी। पार्टी जहां विकास की राजनीति में सबसे आगे खड़ी दिखना चाहती है और इसे चुनावी मुद्दा भी बनाना चाहती है। वहीं 2019 से पहले बदलाव की स्पष्ट बयार भी पेश करना चाहती है।
शनिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को छोड़कर पार्टी के सभी आठ मुख्यमंत्री मौजूद थे। दिन भर चली बैठक में राज्यों के प्रजेंटेशन, शाह व अन्य वरिष्ठ नेताओं के संबोधन में मुख्यमंत्रियों को यह संदेश दे दिया गया कि उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना होगा। शाह ने उन्हें बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले दो साल में 80 कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इनमें से 65 योजनाएं ऐसी हैं जिन्हें राज्यों को ही करना है। अमित शाह ने कहा कि सुधार और जन कल्याण एक साथ एक गति से चलनी है और इसके लिए हर किसी को कमर कसनी होगी। शाह ने दावा किया कि भाजपा ने प्रदर्शन की राजनीति की शुरूआत की है और यही कारण है कि बार बार चुनकर सत्ता में आती है। उन्होंने निर्देश दिया कि शहरों और गावों का विकास एक गति से होना चाहिए और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
बाद में मीडिया से बातचीत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस ने भाजपा नेतृत्व की सोच को स्पष्ट कर दिया। फडणवीस ने कहा कि भाजपा के एक हजार से ज्यादा विधायक है, 300 से ज्यादा सांसद हैं, 11 करोड़ सदस्य है और भाजपा शासित राज्यों में देश की 35 फीसद जनता रहती है, 52 फीसद भूभाग आता है और जीडीपी में 41 फीसद हिस्से का योगदान देता है। लिहाजा भाजपा के राज्य भी पूरे जतन से लगें तो देश का विकास कोई रोक नहीं सकता है। अलग अलग मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्यों में शुरू की गई नई पहली की भी जानकारी दी और शाह ने सुझाव दिया कि सभी राज्य एक दूसरे का अच्छा अनुभव बांटें और उन्हें लागू करें। मुख्यमंत्रियों ने केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं- स्वच्छता, फसल बीमा आदि योजनाओं क्रियान्वयन की रिपोर्ट भी दी। मुख्यमंत्रियों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि वह अपने मंत्रियों और विधायकों को जनता के संपर्क में रहने को भी कहें। 2011 के बाद पहली बार हो रही ऐसी बैठक अब शायद हर साल हुआ करेगी ताकि भाजपा शासित राज्य में कोई शिथिलता न रहे।



0 comments:
Post a Comment