भीषण बाढ़ की चपेट में बिहार के बारह जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. जिसमें से ज्यादा प्रभावित इलाका पटना, बेगूसराई, खगड़िया, कटिहार और वैशाली जिला हैं. अनुमान लगे जा रहा हैं कि इस प्राकृतिक आपदा से करीब करीब 30 लाख लोग प्रभावित हैं. देखा जाय तो इस साल बिहार में इतनी बारिश नही हुई कि ऐसी बाढ़ कि स्थिति उत्पन हो. बिहार में बाढ़ आने का मुख्य कारण हैं फरक्का बराज. जिसकी वजह से बिहार के मुख्यमंत्री ने इसे विघटित करने की मांग की है. क्योकि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद की मात्रा बढ़ती जा रही है. जिसके चलते गंगा के छिछली होने के साथ ही गंगा का पानी को समुद्र में जाने में अवरोध भी लगा रहा हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री का मानना है कि इस बार काफी वर्षा के चलते यूपी में रिहंद बांध से और एमपी में बेन्सागर बांध से काफी मात्रा में पानी छोड़ा गया है. क्योंकि बारिश इस बार बिहार में सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही है. 719.9 मिमी में सामान्य बारिश मानी जाती है, जबकि बारिश हुई केवल 615 मिमी. यहां तक कि बिहार के 152 ब्लॉक् में सामान्य से 40 फीसदी बारिश कम हुई है.
मुख्यमंत्री का मानना है कि फरक्का बराज से फायदे कम नुकसान ज्यादा हैं. गंगा का 16 प्रतिशत कैचमेंट एरिया बिहार में पड़ता है. लेकिन लीन सीजन में गंगा में बहते हुए कुल पानी का तीन चौथाई बिहार की नदियों से आता है. उत्तर प्रदेश बिहार बॉर्डर पर 400 cusec वाटर फ्लो मिलता है, जबकि फरक्का बराज पर 1500 cusec वाटर फ्लो की जरूरत होती है. जो कि बिहार की नदियों से ही प्राप्त होता है.ऐसे में उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह गंगा में अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम तक बिना रुकावट के पानी का बहाव सुनिश्चित करें. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि नेशनल सिल्टेशन पालिसी बनायीं जाए. हालांकि फिलहाल केंद्र ने इस पर चुप्पी साध रखी है.
बिहार के मुख्यमंत्री का मानना है कि इस बार काफी वर्षा के चलते यूपी में रिहंद बांध से और एमपी में बेन्सागर बांध से काफी मात्रा में पानी छोड़ा गया है. क्योंकि बारिश इस बार बिहार में सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही है. 719.9 मिमी में सामान्य बारिश मानी जाती है, जबकि बारिश हुई केवल 615 मिमी. यहां तक कि बिहार के 152 ब्लॉक् में सामान्य से 40 फीसदी बारिश कम हुई है.
मुख्यमंत्री का मानना है कि फरक्का बराज से फायदे कम नुकसान ज्यादा हैं. गंगा का 16 प्रतिशत कैचमेंट एरिया बिहार में पड़ता है. लेकिन लीन सीजन में गंगा में बहते हुए कुल पानी का तीन चौथाई बिहार की नदियों से आता है. उत्तर प्रदेश बिहार बॉर्डर पर 400 cusec वाटर फ्लो मिलता है, जबकि फरक्का बराज पर 1500 cusec वाटर फ्लो की जरूरत होती है. जो कि बिहार की नदियों से ही प्राप्त होता है.ऐसे में उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह गंगा में अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम तक बिना रुकावट के पानी का बहाव सुनिश्चित करें. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि नेशनल सिल्टेशन पालिसी बनायीं जाए. हालांकि फिलहाल केंद्र ने इस पर चुप्पी साध रखी है.



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