उत्तर प्रदेश की स्वाति सिंह प्रदेश में किसी पहचान की मोहताज नही हैं. स्वाति सिंह को यह पहचान उनका खुद का बनाया हुआ हैं. ज्ञात हैं कि अपनी बेटी और खुद की इज्जत की लडाई लड़ने के लिए पहली बार स्वाति सिंह जनता के सामने आई थी. जो अब सभाओं में हुंकार भरने लगी है. जिस स्वाति सिंह पर बीजेपी दयाशंकर सिंह के बदले दांव लगाना चाहती है वो अपने पति के साथ मायावती के रैलियों के समानांतर खुद को खड़ा करने की कोशिश में हैं.
मायावती जब 21 अगस्त को आगरा में पहली चुनावी रैली कर रही थी तो स्वाति और दयाशंकर कानपुर और हाथरस में अपनी पहली सभा कर रहे थे. अब जब 28 अगस्त को मायावती आजमगढ में दूसरी रैली करने वाली हैं तो स्वाति और दयाशंकर अपने गृह जिला बलिया में अपनी दूसरी सभा करेगें. इसे बाढ़ की वजह से बाद में टाल दिया गया.
दयाशंकर सिंह के विवादित बयान के बाद बीएसपी की रैली में गाली-गलौज के नारे पर पहली बार स्वाति सिंह खुलकर सामने आई थीं. तब स्वाति की ललकार से बीएसपी और मायावती भी बैकफुट पर आ गई थी. महीने भर पहले तक जिस स्वाति सिंह को कोई नहीं पहचानता था उन्हें अब पूरा प्रदेश पहचानता है. महज एक महीने में ही स्वाति सिंह मायावती को चुनौती दे रही हैं.
स्वाति सिंह की क्षमता को बीजेपी ही भांप चुकी है. लोग चाहते हैं कि स्वाति चुनाव भी लड़े. एक महीने में मिली प्रसिद्धि देखकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में लोग उनकी रैलियां कराना चाहते हैं. दरअसल मायावती से भिड़ने की सीधी तैयारी स्वाति सिंह की है. माना जा रहा है कि इसके पीछे दिमाग तो बीजेपी का है लेकिन बैनर और झंडा क्षत्रिय महासभा का है.
स्वाति सिंह अपनी सभाओं में 12 साल की बेटी और खुद को गाली देने को मुद्दा बनाती हैं. नसीमुद्दीन सिद्दकी के खिलाफ एफआईआर होने और पॉक्सो एक्ट लगने के बावजूद कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होने को अपनी सभाओं में मुद्दा बना रही है. लोगों से वह किसी भी सूरत में बीएसपी को वोट नहीं देने की अपील करती हैं.
मायावती जब 21 अगस्त को आगरा में पहली चुनावी रैली कर रही थी तो स्वाति और दयाशंकर कानपुर और हाथरस में अपनी पहली सभा कर रहे थे. अब जब 28 अगस्त को मायावती आजमगढ में दूसरी रैली करने वाली हैं तो स्वाति और दयाशंकर अपने गृह जिला बलिया में अपनी दूसरी सभा करेगें. इसे बाढ़ की वजह से बाद में टाल दिया गया.
दयाशंकर सिंह के विवादित बयान के बाद बीएसपी की रैली में गाली-गलौज के नारे पर पहली बार स्वाति सिंह खुलकर सामने आई थीं. तब स्वाति की ललकार से बीएसपी और मायावती भी बैकफुट पर आ गई थी. महीने भर पहले तक जिस स्वाति सिंह को कोई नहीं पहचानता था उन्हें अब पूरा प्रदेश पहचानता है. महज एक महीने में ही स्वाति सिंह मायावती को चुनौती दे रही हैं.
स्वाति सिंह की क्षमता को बीजेपी ही भांप चुकी है. लोग चाहते हैं कि स्वाति चुनाव भी लड़े. एक महीने में मिली प्रसिद्धि देखकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में लोग उनकी रैलियां कराना चाहते हैं. दरअसल मायावती से भिड़ने की सीधी तैयारी स्वाति सिंह की है. माना जा रहा है कि इसके पीछे दिमाग तो बीजेपी का है लेकिन बैनर और झंडा क्षत्रिय महासभा का है.
स्वाति सिंह अपनी सभाओं में 12 साल की बेटी और खुद को गाली देने को मुद्दा बनाती हैं. नसीमुद्दीन सिद्दकी के खिलाफ एफआईआर होने और पॉक्सो एक्ट लगने के बावजूद कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होने को अपनी सभाओं में मुद्दा बना रही है. लोगों से वह किसी भी सूरत में बीएसपी को वोट नहीं देने की अपील करती हैं.



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