इतिहास दोहरा रहा अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय, प्रथम दीक्षांत समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी - President Pranab Mukherjee Came To Nalanda Today

आज नालंदा इतिहास दोहरा रहा है. पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज जीवित होते तो शायद अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल भी होते और सबसे ज्यादा खुश होते. इसके  प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भाग लेंगे. इनके साथ राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने आए हैं.  इस समारोह में 12 छात्रों को उपाधि दी जाएगी .

करीब 833 वर्ष पूर्व आक्रमणकारियों के हाथों तबाह हुए विश्वविद्यालय का नया स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के पहले बैच के देशी विदेशी छात्र यहां से डिग्री लेकर जा रहे हैं। विश्वविद्यालय की परिकल्पना का श्रेय डॉ. कलाम को जाता है।2006 में बिहार दौरे के क्रम में उन्होंने बिहार विधान मंडल के संयुक्त अधिवेशन में उन्होंने अपनी इस परिकल्पना को रखा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी यह परिकल्पना खूब भाई और उन्होंने इसे सच करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। केन्द्र का भी काफी सहयोग मिला और परिणाम आज सबके सामने है।

लगभग आठ दशक बाद फिर से नालंदा विश्वविद्यालय से शिक्षा की मंद-मद बयार बहने लगी है. पांचवीं सदी में स्थापित इस विश्वस्तरीय शिक्षा के केंद्र को तीन बार विदेशी आक्रमणकारियोंने तहस-नहस किया और अब 21 वीं सदी में नालंदा एक बार फिर से अपनी खोयी हुई गरिमा को स्थापित करने के प्रयास में हैं. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर से करीब 10 किलोमीटर दूर राजगीर के पिलखी गांव में 445 एकड़ क्षेत्र में इसे दोबारा विकसित किया जा रहा है. इस विश्वविद्यालय के बिल्डिंग का निर्माण 2021 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है. एशिया के साथ ही पूरे विश्व के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का यह सबसे बड़ा केंद्र  होगा. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का नया स्वरूप नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का होगा.
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