सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हर परेशानी दूर नहीं हो सकता: मुख्य न्यायाधीश The Supreme Court could not be farther from every trouble: CJ

नई दिल्ली,  क्या अदालत भी भावनात्मक पहलुओं से जुड़ कर अपना निर्णय बदल देती है, यहां निर्णय यानि फैसला से मेरा मतलब नहीं हैं , बल्कि किसी की भावनात्मक बातों को ध्यान में रखते हुए अपना आदेश बदलने से है । ऐसा ही एक वाक्यां आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश और एक याचिकाकर्ता के साथ देखने को मिला ।
मामला यह है कि आज एक याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर को भावनात्मक रूप से इस तरह मना लिया कि मुख्य न्यायाधीश को उसे अदालत कक्ष से बाहर निकालने का आदेश न सिर्फ रद्द करना पड़ा, बल्कि उसकी याचिका को खारिज करने का आदेश भी वापस ले लिया।
याचिकाकर्ता देशभर के फुटपाथों और सड़कों से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहा था। उसकी याचिका गत वर्ष तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तू ने स्वीकार कर नोटिस जारी कर दिया था। लेकिन जब शुक्रवार को याचिका सुनवाई पर आई तो जस्टिस ठाकुर ने कहा कि कोर्ट का काम सड़कों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने का नहीं है। हमारे पास और भी महत्वूपर्ण काम है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
कोर्ट ने कहा कि अगर यह आदेश दे दें कि देश में भ्रष्टाचार खत्म हो तो क्या ऐसा होगा? क्या सुप्रीम कोर्ट यह कहे कि देश में कोई अपराध ना हो, कोई कत्ल ना हो, रेप न तो क्या ये हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट अगर आदेश करे कि देशभर में फुटपाथ से कब्जे हटाए जाएं तो क्या आदेश का पालन हो जाएगा। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि कोर्ट सब बुराइयों को ठीक नहीं कर सकता, हमारी भी एक सीमा है सबका इलाज सुप्रीम कोर्ट नहीं है।
याचिकाकर्ता गिड़गिड़ाने लगा और कहा कि सर ऐसा मत कीजिए क्योंकि यह बहुत बड़ी परेशानी है और पूरे देश इससे परेशान है, हम खून के आंसू रो रहे हैं। इस पर जस्टिस ठाकुर नाराज हो गए और कहा हम भी आंसू रो रहे हैं लेकिन कौन सुन रहा है, कोर्ट ने पुलिस से कहा, उसे बाहर निकाला जाए।

लेकिन याचिकाकर्ता और भावुक हो गया और बोला कि सरकार हम कहां जाएं नगर निगम और पुलिस सुनती नहीं, नेता देश की बुनियाद में लगी ईंटें तक बेचने को आतुर हैं। पिछले चीफ जस्टिस साहब ने इस याचिका पर नोटिस किया था और जब मैं घर से चला तो भगवान से मना रहा था कि नए चीफ जस्टिस साहब इस पर सकारात्मक रुख लेंगे।
आप भी ऐसा करेंगे तो आम व्यक्ति के विश्वास का क्या होगा। जो लोग इस उम्मीद में हैं कि इस समस्या से सुप्रीम कोर्ट निजात दिलाएगा उनको मैं क्या जवाब दूंगा। कोर्ट ने कहा ठीक है याचिका को फरवरी 2017 के लिए स्थगित किया जाता है, इस पर याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश को लंबी आयु की दुआ दी और बाहर चला गया। अब यह मामला अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर के समक्ष आएगा क्योंकि जस्टिस ठाकुर 3 जनवरी को रिटायर हो जाएंगे।
                                               



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