उत्तर प्रदेश सरकार की पार्टी में चल रहे विवाद कही से भी ख़त्म होते नही देख रहा हैं. इसको सुलझाने के लिए खुद नेताजी मुलायम सिंह यादव को मैदान में उतरना पड़ा उनके हस्तक्षेप के बाद अखिलेश और शिवपाल दोनों ने समझौता कर लिया, शिवपाल के पास प्रदेश अध्यक्ष का पद है और साथ ही सारे विभाग भी उन्हें भतीजे अखिलेश ने वापस दे दिया है. वहीं खबर है कि अखिलेश टिकट बंटवारे में कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं, जिसपर शिवपाल ने अपनी सहमति दे दी है.
इसी बीच खबर है कि अखिलेश के समर्थकों ने शिवपाल यादव के साथ काम करने से इनकार कर दिया है. सपा के चारों युवा संगठन युवाजन सभा, लोहियावाहिनी, मुलायम ब्रिगेड और छात्रसभा ने मुलायम को पत्र लिखकर यह कहा है कि वे शिवपाल के साथ काम करना नहीं चाहते हैं. यह चारों संगठन अखिलेश के समर्थक हैं.
अखिलेश के समर्थक डिंपल और अखिलेश के पोस्टर लेकर उन्हें दोबारा अध्यक्ष पक्ष देने और उनके सम्मान की वापसी की मांग कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है, नेताजी ने सबका सम्मान वापस दिलवाया तो उन्हें अखिलेश यादव का सम्मान भी वापस दिलवाना चाहिए.
कल मुलायम की पहल के बाद भ्रष्टाचार के आरोपी बर्खास्त खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को वापस मंत्रिमंडल में लिये जाने की घोषणा हुई. मुलायम द्वारा अखिलेश पर इन फैसलों को लेकर दबाव बनाया गया, जिससे उनके समर्थक नाराज हैं और आज प्रदर्शन कर रहे हैं.
इसी बीच खबर है कि अखिलेश के समर्थकों ने शिवपाल यादव के साथ काम करने से इनकार कर दिया है. सपा के चारों युवा संगठन युवाजन सभा, लोहियावाहिनी, मुलायम ब्रिगेड और छात्रसभा ने मुलायम को पत्र लिखकर यह कहा है कि वे शिवपाल के साथ काम करना नहीं चाहते हैं. यह चारों संगठन अखिलेश के समर्थक हैं.
अखिलेश के समर्थक डिंपल और अखिलेश के पोस्टर लेकर उन्हें दोबारा अध्यक्ष पक्ष देने और उनके सम्मान की वापसी की मांग कर रहे हैं. समर्थकों का कहना है, नेताजी ने सबका सम्मान वापस दिलवाया तो उन्हें अखिलेश यादव का सम्मान भी वापस दिलवाना चाहिए.
कल मुलायम की पहल के बाद भ्रष्टाचार के आरोपी बर्खास्त खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को वापस मंत्रिमंडल में लिये जाने की घोषणा हुई. मुलायम द्वारा अखिलेश पर इन फैसलों को लेकर दबाव बनाया गया, जिससे उनके समर्थक नाराज हैं और आज प्रदर्शन कर रहे हैं.



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