इटावा में दलित महिलाओं के केष काटने तथा प्रताणित करने के मामले में
साहिबाबाद,(प्रमुख संवाददाता) साहिबाबाद निवासी एक मानवाधिकार कार्यकर्ता की पैरवी पर इटावा जिले के एक गांव में दलित महिलाओं के केष काटने तथा प्रताणित करने के मामले का राश्ट्रीय मानवाधिकार अयोग ने संज्ञान लेते हुए यूपी के डीजीपी को जवाब तलब किया है। आरोपी दबंग तथा प्रदेष की सपा सरकार के पदाधिकारी बताये गये हैं। पुलिस पर भी आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बदले पीड़ितों को ही धमकाने का आरोप है।
मामला 16जुलाई 2016 की दोपहर 2.50 का है। पीड़ित महिला दलित समुदाय से हैं जिनमें एक बृद्ध सास और उसकी बहू है। बहू की ओर से आयोग को की गयी षिकायत में बताया गया है कि वे महाबीरपुर इकदिल जिला इटावा की रहने बाली हैं। वे गरीव एवं दलित समुदाय के लोग हैं तथा उनके घर में षौचालय नहीं है। वे दोनों दोपहर में षौच के लिये गांव के एक तालाव के पास गयीं थी जहां पहले से ही गांव के अर्जुन सिंह राजपूत,अखिलेष यादव राजेष पटेल तथा उनके 5-7 लोग थे। सभी लोग वहां तालव में भराव करा रह थे। षौच के लिये लोक लाज के कारण बृद्ध महिला ने उनसे कहा कि वे यहां से चले जांय क्योंकि उन्हें षौच कराना है। लेकिन वे नहीं गये उल्टा उन्हें मारा पीटा तथा बहू के साथ वहां खड़ी कार में बलात्कार करने का प्रयास किया। जव सास ने बहू को बचाने का प्रयास किया तो दबंगों ने बृद्धा और बहू को जमक र मारा पीट तथा बाद में कार से बाल काटने की मषीन मंगा कर बृद्धा का मुंडन कर दिया। जानकारी होने पर जव महिलाओं को बचाने गांव बाले आये तो उन्हें हबाई फायर कर दिया गया।
महिलाओं ने बताया है कि पहले उन्होंने पुलिस नियंत्रण कक्ष को फोन किया लेकिन वहां फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में थाने पहुंच कर षिकयत की गयी । महिलाओं का आरोप है कि पहले तो उनकी रिपोर्ट पुलिस ने नहीं लिखी उल्टा उन्हें धमकाया गया। बताया जाता है कि आरोपी यूपी की सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं तथा उनकी थाने में अच्छी धाक है।
इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने यूपी के डीजीपी को षिकायती पत्र भेज कर मामले की जांच कराने तथा दोशियों के खिलाफ की गयी कार्यवाही व जांच की रिपोर्ट आयोग को 4 सप्ताह में देने के निर्देष दिये हैं।



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