उष्मा रोधी होने के कारण बढ़ रही है वैदिक प्लास्टर की मांग-Vedic Plaster Demand Increases

रोहतक: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के बीच ऐसे मकानों की प्रासंगिकता आज बढ़ रही है जो उष्मा रोधी हों ताकि सर्दी और गर्मी दोनों से ही बचाव हो सके। पहले मिट्टी के बने और गोबर से लिपे कच्चे घरों में उष्मा को रोकने की क्षमता थी और उनमें सर्दी और गर्मी दोनों से बचाव होता था लेकिन अब कच्चे मकान व्यवहारिक नहीं है और इसीलिये पक्के मकानों को ही इस तरह का बनाने के लिये ऐसा प्लास्टर तैयार किया गया है जो उष्मा रोधी हो।
यह वैदिक प्लास्टर प्रख्यात वैज्ञानिक डॉक्टर शिव दर्शन मलिक के दिमाग की देन है जिनका कहना है कि वैदिक प्लास्टर ध्वनि एवं अग्नि रोधक है तथा मकान को गर्मी में ठंडा तथा सर्दी में गर्म रखता है। इसके अलावा, इस प्लास्टर में गोबर का मिश्रण होने की वजह से यह प्राकृतिक वायु शोधक है और वातावरण को प्रदूषण मुक्त रखता है। यह अपने आप में पूर्ण है क्योंकि इसमें रेत मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही तराई करने की जरूरत पड़ती है।
भाषा से विशेष बातचीत में डॉ मलिक ने बताया ‘पहले कच्चे मकानों में लोग रहते थे। मिट्टी के बने होने और गोबर की लिपाई के कारण कच्चे मकान उष्मा रोधी थे और लोगों को सर्दी और गर्मी दोनों से ही बचाते थे। वहीं अब पक्के मकान स्टील, सीमेंट, पत्थर, रेत और पक्की ईंटों से बनते हैं। ये सभी चीजें उष्मा की सुचालक हैं जिससे मकान गर्मी में गर्म और सर्दी में ठंडे रहते हैं।’
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