संपादकीय
कावेरी जल विवाद कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच हिंसक बन गया है । दोनों राज्य हिंसा की आग में जल रहे हैं । सात थानों में कफ्र्यू लगा हुआ है । कर्नाटक में तमिल नंबर की और तमिलनाडु में कर्नाटक नंबर की 108 से ज्यादा गाड़ियां फंक दी गई है । 50 - 60 दुकानें भी लूटी गई हैं । इस दौरान फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हुई है और दो गंभीर रूप से घायल हुए हैं । कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया के घर पर लोगों ने पत्थर फेंके । अलग - अलग जगहों पर करीब 250 लोग हिरासत में लिए गए हैं । बेंगलुरू समेत कई शहरों में स्कूल - काॅलेज बेद कर दिए गए हैं । कावेरी जल की आग का मुख्य कारण क्षे़त्रीय स्तर पर लोगों की आपसी हित साधना ही लगता है । कल ही सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर नया आदेश दिया है कि कर्नाटक हर रोज तमिलनाडु के लिए 15000 क्यूसेक पानी के जगह अब 12000 क्यूसेक पानी छोडेगा । इस फैसला को देखते हुए एक तरफ कर्नाटक का गुस्सा शांत हो जाना चाहिए, वहीं तमिलनाडु को भी कर्नाटक के लोगों का नुकसान नहीं करना चाहिए । लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि दोनों राज्य एक - दूसरे के खिलाफ तलवारें अभी भी खींच रखें हैं । क्या इस तरह दो पड़ोसी राज्यों के किसी भी विवाद का हल निकल पायेगा । लोगों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी स्तर पर अपना क्षेत्रीय एकाधिकार समझने के वजाय ऐसे मुद्दों का हल निकालना होगा, तभी कोई भी राज्य चैन से अपना विकास कर पायेगा । देशहित को सर्वोपरी रखना होगा क्योंकि कोई भी राज्य अपने देश का हिस्सा नहीं मानता तो यह देश की संप्रभुता को चुनौती देना है । 1892 से चल रहे इस विवाद में पहले कर्नाटक, मैसूर और मद्रास राज्य ही थे, लेकिन अब केरल और पंुडुचेरी भी जुड़ गए हैं । यह विवाद न तो अंतरराज्यीय जल विवाद कानुन से हल हो पा रहा है और न ही कावेरी जल पंचाट से ही । आखिरकार इसे हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न विशेषज्ञों की राय पर यह फार्मूला निकाला कि कनार्टक हर साल कितना पानी तमिलनाडु के लिए जारी करेगा और कितना पानी केरल और पुंडुचेरी को देगा । लेकिन कर्नाटक अपने यहां के किसानों के दबाव में हर वर्ष सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पानी नहीं छोड़ता जिसका नतीजा यह होता है कि तमिलनाडु हर वर्ष कोर्ट के अवमानना की याचिका दायर करता है । इसी तरह पंजाब और हरियाणा में भी कई वर्षो से पानी का विवाद सुलग रहा है , साथ ही दिल्ली तथा हरियाणा का भी पानी का मुद्दा हर वर्ष छाया रहता है । उधर नेपाल और बिहार में भी पानी को लेकर हर वर्ष एक खींचाव बना रहता है । हम सब को अपने स्वार्थ से उपर उठ कर देशहित में कदम बढ़ाना होगा तभी सभी का कल्याण हो पायेगा ।
tripathi.sanjay290@gmail.com



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