चीन से चतुराई से निपटना होगा By संजय त्रिपाठी China maneuvered to be dealt with



चीन बार - बार भारत के रास्ते में रूकावट डाल रहा है, साथ ही अपनी चैधराहट दिखाना चाहता है । भारत को ऐसे समय में बहुत ही सुझबुझ और समझदारी से काम लेना पडेगा। चीन ने पहले भारत - पाक के सिंधु समझौते के मुद्दे पर पाकिस्तान का ढाल बनने का एक प्रयास कर चुका है जिसके तहत ब्रह्मपुत्र नदी के एक सहायक नदी का पानी रोक दिया । कारण चाहे जो भी हो लेकिन यह मानना ही पड़ेगा कि चीन का मकसद भारत का सिंधु नदी समझौते पर पाक के खिलाफ सख्ती अपनाने से पहले ही एक धमकी थी । हालांकि चीन ओर भारत के बीच ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है । फिर भी चीन ने अपनी चैधराहट दिखाते हुए पाक का साथ दिया और भारत को एक धमकी भरा संदेश । इधर जैश - ए - मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र से बैन लगवाने की भारत की कोशिशों पर पानी फेर दिया था । इसके दो दिन बाद यानी सोमबार को ही एक बार फिर भारत के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है । उसने आरोप लगाया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है । हालांकि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप ; छैळ द्ध  में भारत की एंट्री के विरोध पर नरमी दिखाते हुए उन्होंने बातचीत से मामला सुलझाने पर जोर दिया । चीन के राष्ट्रपति शी चीनफिंग इसी हप्ते ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत आने वाले हैं । इसकी जानकारी दे रहे चीन के उप विदेश मंत्री ने मुंबई और पठानकोट हमलों के साजिशकर्ता मसूद अजहर पर सवाल के जवाब में कहा कि हम हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ हैं, लेकिन इस पर दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए । एनएसजी के एंट्री पर हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने की भारत की कोशिश का समर्थन नहीं करेंगे । चीन का मौजुदा नेतृत्व पाकिस्तान के पक्ष में जिस तरह की हरकते कर रहा है, उससे साफ लगता है कि चीन की नियत साफ नहीं है और वह भारत को दबाव में रखना चाहता है । चीन का मकसद भारतीय  उपमहाद्वीप में सर्वोपरी बनने की है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ा रूकावट भारत है जिसे वह किसी - न - किसी तरह पीछे धकेलना  चाहता है । हालांकि भारत इतनी तेजी के साथ विकास के तरफ अग्रसर है जिसे देख चीन के तोते उड़े हुए हैं । चीन चाह कर भी भारत से अब युद्ध नहीं कर सकता क्योंकि जितनी तेजी से वह आगे बढ़ा है उतनी ही तेजी से पतन के तरफ अग्रसर हो जाएगा । आज के समय में चीन को लेकर यह कोई मुहाबरा नहीं है कि ‘ आज का भारत 1962 का भारत नहीं हैं’, बल्कि यह 21 वीं सदी की हकीकत है । चीन की अर्थ व्यवस्था भारतीय बाजार पर टीकी हुई है, क्योंकि कल ही चीनी मीडिया ने कहा है कि यहां के उधोगपति भारत के चीनी उत्पाद पर बैन लगाने की अफवाह से घबडाएं हुए हैं । साथ ही चीन को यह भी देखना होगा कि भारत ही एक मा़त्र वह राष्ट्र है, जो पड़ोसियों से हमेशा भाईचारे के साथ रहना चाहता है । कहा जाता है कि 1962 के युद्ध में चीन ने दोस्ती पर वार किया था, क्योंकि उस समय लोग यही नारा लगाते थे कि भारत - चीन भाई - भाई । फिर भी हमें चीन से सचेत रह कर ही सारी दुनिया से संबंद्ध बनाना होगा । 
संजय त्रिपाठी 

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