अब सैनिक शिविरों के आसपास घूमना खतरे से खाली नहीं By सुरेश डुग्गर Now revolve around military camps dangerous

म्मू कश्मीर तथा पड़ोसी पंजाब में अब सैनिक शिविरों के आसपास घूमना खतरे से खाली नहीं होगा। 

सैनिक शिविरों के आसपास दिखाई पड़ने वाले संदिग्ध व्यक्तियों को गोली मारने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। ऐसा आतंकियों के बढ़ते आत्मघाती हमलों के दृष्टिगत किया जा रहा है। इसके साथ ही सैनिक शिविरों की सुरक्षा को चाक चौबंद करने के लिए जो निर्णय लिए गए हैं उनमें वाच टावरों को बनाए जाने तथा उन पर फ्लड लाइटों के साथ चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मियों को तैनात किए जाने की तैयारी की जा रही है। और अधिकारियों की मानें तो बीसियों आतंकी एलओसी क्रास कर कश्मीर में घुसने में कामयाब रहे हैं। नतीजतन कश्मीर की शांति खतरे में पड़ गई है। सेना ने आतंकी हमलों को रोकने की खातिर रात्रि तलाशी अभियान तेज करते हुए रात्रि गश्त के साथ-साथ नाकेबंदी की पुरानी रणनीति भी अपनाई है जिस कारण लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

आतंकवादियों के आत्मघाती हमलों को रोकने के लिए जम्मू कश्मीर तथा पड़ोसी पंजाब में सुरक्षा प्रतिष्ठानों तथा संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा प्रबंध अपनाए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हाल ही के आत्मघाती हमलों में आई तेजी के मद्देनजर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। ताजा निर्देशों के अंतर्गत जो सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं वे विशेषकर सेना के शिविरों, ब्रिगेड मुख्यालयों, पुलिस तथा अर्द्ध सैनिक बलों के शिविरों के लिए तत्काल तौर पर लागू किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय की ओर से जो ताजा निर्देश राज्य में सक्रिय सुरक्षाधिकारियों व पुलिस महानिदेशक को जारी किए गए हैं उनमें यह सुनिश्चिम करने के लिए कहा गया है कि सुरक्षा शिविरों व मुख्यालयों के आसपास ऐसे सुरक्षा प्रबंध किए जाने चाहिए जिन्हें लांघ कर फिदायीन किसी सुरक्षा शिविर, मुख्यालय या फिर चौकी के पास भी न फटकने पाएं। और संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी चेतावनी के गोली भी मार दी जाए।

निर्देशों के अनुसार प्रत्येक सुरक्षा चौकी, मुख्यालय तथा सुरक्षा शिविरों के आसपास के तीन सौ मीटर तक के क्षेत्र को पूरी तरह से साफ किया जाएगा और वहां कांटेदार तार लगाई जाएगी। जहां ईंटों की ऊंची दीवारें नहीं हैं वहां उनको तत्काल रूप से निर्मित किया जाए तथा उन्हें रेत के बोरों से सहारा दिया जाए ताकि फिदाइन राइफल ग्रेनेडों या फिर राकेटों से इन सभी को भेध नहीं पाएं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि नए सुरक्षा प्रबंधों को बहुस्तरीय रखा गया है। पहले स्तर में सबसे बाहर सुरक्षा शिविर या सुरक्षा चौकी के चारों ओर बंदूकधारी गार्डों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर तैनात किया जाएगा और उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें रेत के बोरों के बंकर बना कर दिए जाएंगे।

सुरक्षा शिविरों के लिए की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था का दूसरा स्तर भी इसी तरह का होगा जो पहले स्तर के काफी भीतर होगा। नए निर्देशों के तहत प्रत्येक बंकर या संतरी चौकी पर दो से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा ताकि आतंकवादी हमले का डट कर मुकाबला किया जा सके। साथ ही वाच टावरों का निर्माण किया जाएगा जिन पर चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मियों द्वारा पहरा दिया जाएगा और उनके पास फ्लड लाइटें भी होंगी जो रात के समय आसपास के क्षेत्र पर नजर रखने में काम आएंगी।

बताया जाता है जम्मू कश्मीर में चल रहे विद्युत संकट पर भी रक्षा मंत्रालय ने गहरी चिंता प्रकट की है। बिजली की आपूर्ति न होने की स्थिति में इन शिविरों आदि को जनरेटरों का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा गया है तथा बिजली न होने की स्थिति में सुरक्षा गार्डों के पास सर्च लाइटों को रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। वैसे रक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा शिविरों तथा मुख्यालयों को बिजली की आपूर्ति में कोई कटौती न करें।

फिदायीनों से निपटने के लिए जो सबसे चौंकाने वाले निर्देश जारी किए गए हैं वह है उन ‘पकड़ो और मारो’ के साथ साथ फिदायीनों के खात्मे के लिए महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण तीन मंजिला इमरातों को भी ढहा दिया जाए अगर उसमें फिदायीन घुस कर शरण लेते हैं। गौरतलब है कि कश्मीर तथा पंजाब में होने वाले कई फिदायीन हमलों में सुरक्षा बलों ने उन इमारतों को उड़ा दिया था जहां फिदायीन घुसे थे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि पिछले पखवाड़े पाक सेना बीसियों आतंकियों को इस ओर धकेलने में कामयाब हुई है। घुसपैठ करने वाले ताजा आतंकियों के प्रति चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वे अति घातक हथियारों से लैस हैं जिन्हें कश्मीर की शांति भंग करने का टास्क दिया गया है। एक सैन्य सूत्र के मुताबिक, एलओसी के कुछ इलाकों में संदिग्ध व्यक्ति देखे गए हैं। हालांकि इस सूत्र ने उन इलाकों की निशानदेही करने से इंकार करते हुए कहा कि इलाकों की पहचान बताए जाने से वहां लोगों में दहशत फैल सकती है।

आतंकियों के ताजा दलों द्वारा घुसपैठ में कामयाब होने के बाद उनके इरादों के बारे में मिली जानकारी सुरक्षाधिकारियों को परेशान कर रही है। वे बताते हैं कि उन्हें भयानक तबाही मचाने का टास्क दिया गया है। वैसे वे इससे भी इंकार नहीं करते थे कि घुसपैठ करने वालों में तालिबानी, अल-कायदा या आईएस के सदस्य हो सकते हैं क्योंकि सुने गए वायरलेस संदेश इसके प्रति शंका पैदा करते थे।
अधिकारियों का कहना था कि स्थिति से निपटने की खातिर सेना को रात्रि गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। सेना ने रात्रि तलाशी अभियान फिर से आरंभ किए हैं। साथ ही नाकेबंदी में सेना की सहायता भी ली जाने लगी है। यह सच था कि सेना द्वारा स्थानीय प्रशान को एलओसी के इलाकों में मदद दिए जाने के कारण आम नागरिकों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पर एक नागरिक प्रशासनिक अधिकारी का कहना था कि सुरक्षा की खातिर इतनी असुविधा को तो सहन करना होगा।

सुरक्षा बल कहने लगे हैं कि घुसपैठ को पूरी तरह से रोक पाना संभव नहीं हो रहा है। फिर से आतंकी हिंसा के बढ़ने की चेतावनी ने कश्मीरियों को परेशान कर दिया है। यूं तो सेना एलओसी पर चप्पे चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का दावा करती है पर परदे के पीछे वह इसे स्वीकार करती है कि तारबंदी, लाखों सैनिकों की तैनाती और उपकरणों की उपस्थिति के बावजूद उबड़-खाबड़ एलओसी पर इक्का-दुक्का घुसपैठ की वारदातों को रोक पाना संभव नहीं है।

सेना भी मानती है कि पाक सेना घुसपैठ की नीतियों में जबरदस्त बदलाव लायी है। अब वह परंपरागत रास्तों और तरीकों को छोड़ कर नए तरीके अपना रही है। जिसमें वाया नेपाल और जम्मू बार्डर से आतंकियों को बिना हथियारों के धकेलना तथा एलओसी के रास्ते दो से तीन के गुटों में घुसपैठ करवाना भी शामिल है। सेनाधिकारी मानते हैं कि बर्फबारी से पूर्व कई आतंकी घुसपैठ करने में कामयाब हुए हैं। हालांकि वह साथ ही दावा करती है कि घुसपैठ करने में कामयाब हुए आतंकियों की तलाश अभी भी जारी है। जबकि सुरक्षा एजेंसियां यह कहने से नहीं चूक रहीं कि पिछले कुछ समय से कश्मीर में होने वाली घटनाओं के पीछे ताजा घुसपैठ करने वाले आतंकियों का हाथ था। ताजा चेतावनियों और आतंकी हमलों के दौर में आम कश्मीरी एक बार फिर बुरे हालात के प्रति सोचने लगा है। उसे लगने लगा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बनते बिगड़ते हालात का सीधा असर कश्मीर पर पड़ेगा और वह उसकी रोजी-रोटी को छीन लेगा। सेना भी कुछ ऐसा ही चेता रही है।

 सुरेश डुग्गर

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