हमे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था So we own the robbery, was back where Gairon

                                                               

                                                                 संपादकीय 

पाकिस्तान चोट खाकर भी उस बच्चें के तरह मिट्टी झाड़ खड़ा हो दिखा रहा है, जो अपने दुश्मन या दोस्त से कभी कमजोर होना नहीं दर्शाता है ।  बच्चा पीट तो जाता है लेकिन उसे कभी भी स्वीकार करने को तैयार नहीं होता ऐसे बच्चों को गांव में लोग ‘‘ बेहाया ’’ कहते हैं । बेहाया एक ऐसा पेड़ है जो जिसे तोड़ या उखाड़ कर कही भी फेंक दो वह उस जगह पर भी उग आता है । यहां तक कि पत्थर के दर्रों में भी । इस लिए नलायक, नजायज और अपनी बात ऊपर रखने वाला तथा बार - बार वही गलती दोहराने वाले को लोग ‘‘ बेहाया ’’ कहते हैं । ठीक पाकिस्तान के अंदर भी यह सब गुण पहले से ही मौजुद हैं । पाक  तो विश्व के सामने सर्जिकल स्ट्राइक को नकार ही रहा है, वहां के वजीरे आजम नवाज शरीफ तो यह स्वीकार ही नहीं कर रहे हैं कि उनके पाक अधिकृत कश्मीर में भारत ने हमला कर 40 से भी ऊपर आतंकियों को मार गिराया है । उन्होंने बार्डर पर गोलीबारी में 9 जवानों के मरने की पुष्टी तो जरूर की है । लेकिन हमारे देश में भी इस सर्जिकल स्ट्राइक से कुछ नेताओं के पेट में मरोड हो गया है । खासतौर से क्षेत्रीय पार्टियों के उन प्रमुखों में जो देश का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं । मानता हूं कि वे विरोधी पार्टियों के प्रमुख हैं, विरोधी जब भी हमला करता है तो अपने प्रतिद्वंदी पर ही करता है , उसकी कमियां उसकी बुराईया समाज के सामने रख कर ही तो वह जनता को अपने पक्ष में खींच पाता है । क्या ऐसे समय पर उसका सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा करना उचित हैं । क्या ऐसे मोके पर ही प्रतिद्वंदी को सबक सीखाने का सही समय मिला है । ऐसे नेताओं को भी सोचना चाहिए कि जिस तरह के सवाल आप उठा रहें हैं क्या उससे पाक मजबूत नहीं हो रहा है । पाक और नवाज को भारत के ऐसे कारवाई को नकारना ही पड़ेगा, क्योंकि अगर स्वीकार करते हैं तो आतंकियों को पनाह देने और समर्थन करने का स्पष्ट प्रमाण विश्व के सामने आ जाएगा । साथ ही पाक में सत्ता के खिलाफ चल रहा लहर और तेज हो सकता है जो सरकार और सेना दोनों के लिए समस्या है । आप सोचे उरी हमले के विषय में जब पाकिस्तान का रक्षा मंत्री खुद कहता हुआ डोल रहा था कि यह हमला स्वंय भारत ने ही कराया है, जब राष्ट्र संघ में इस मुल्क का वजीरे आजम यह कह रहा है कि आतंकी बुरहान वानी एक शहीद था तब आखिर भारत क्या करता । जब भी राष्ट्रहित की बात सामने आती है तो न भाजपा, न कांग्रेस सिर्फ भारतवासी हम हो जाते हैं  । यह हमारे देश के सम्मान, अस्मिता और संम्प्रभुता का प्रश्न है । अगर हम भी पाकिस्तान के तरह ही अपने देश के हुक्मरानों पर देशहित के विषय को भी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का करण बना दे तो यह देश के सेना का अपमान ही होगा । आज एक अंग्रेजी अखबार ‘ इंडियन एक्सप्रेस ’ ने पाक के झूठ से पर्दा उठा दिया है । उसने पीओके के चश्मदीदों से जानकरी ली है जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि कई जगह आग से जलता हुआ आतंकी कैंप दिखाई दिया । गोलियों की आवाजे भी सुनाई दी । साथ ही मारे गए लोगों को ट्रकों में लाद कर ले जाया गया । वहीं के अथमुकम में नीलम जिला अस्पताल जाने वाले चश्मदीदों ने दावा किया है कि जो भी लश्कर के लोग मारे गए उन्हें वहां नहीं बल्कि खुफिया तरीके से कहीं और दफनाया गया।” चश्मदीदों ने अल हावी ब्रिज के पास एक बिल्डिंग को जलते देखा। खैराती बाग में लकड़ी से बनी लश्कर की एक बिल्डिंग भारतीय हमले में तहस-नहस हुई। शुक्रवार की नमाज के बाद चालहना में लश्कर के आतंकियों का जमावड़ा हुआ। पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आवाज उठी कि वह बार्डर की हिफाजत नहीं कर सकी। तभी भारत को ऐसा सबक सिखाने का ऐलान हुआ जिसे भारत भूल नहीं पाएगा। जरा सोचे हमें इन प्रमाणों से ज्यादा और क्या चाहिए । पहले तो हमें अपने देश से कोई प्रमाण की जरूरत ही नहीं होना चाहिए । क्योंकि प्रमाण का सवाल खड़ा कर हम उसे सबल बना रहे हैं जो हमें आजादी के बाद से ही चोट - पर - चोट पहुचा रहा है । वहां के सेना और सरकार तभी कायम रह सकती है जब तक वह हिन्दू और हिन्दुस्तान का विरोध करते रहेंगे । खैर, भारत को जब भी चोट पहुंचाया हमारे अपने जयचंद और मीरजाफर ने ही पहुंचाया । इसलिए कहा है - ‘‘ हमे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहा दम था। मेरी किस्ती वहां डूबी जहां पानी कम था । ’’ 
संजय त्रिपाठी  

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