नई दिल्ली। केजी बेसिन में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) की साझेदार निको रिसोर्सेज अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने में जुट गई है। केजी-डी6 ब्लॉक में इस कनाडाई कंपनी की 10 फीसद इक्विटी हिस्सेदारी है। वित्तीय संकट में चल रही निको ने इस साल फरवरी में ही अपनी हिस्सेदारी बेचने का एलान कर दिया था। इस कंपनी पर 34 करोड़ डॉलर (करीब 2,278 करोड़ रुपए) का कर्ज है। पहले कंपनी ने इस हिस्सेदारी की बिक्री के लिए 30 अप्रैल तक का समय रखा था, बाद में बढ़ाकर 31 मई कर दिया। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो निको ने बिक्री को स्थगित कर दिया। निको के अंतरिम सीईओ रॉबर्ट एल्सवर्थ ने कहा, ‘कंपनी ने डी6 ब्लॉक में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। इसकी वजह यह है कि गैस कीमत निर्धारण से जुड़ी कई बातें अनुकूल हो गई हैं। खासतौर पर गहरे पानी में स्थित कंपनी के अविकसित फील्डों से निकलने वाली गैस पर नया कीमत फॉमरूला लागू होगा। केजी-डी6 ब्लॉक में मुकेश अंबानी की रिलायंस की 60 और ब्रिटिश पेट्रोलियम (बीपी) की 30 फीसद हिस्सेदारी है। निको का हिस्सा सबसे कम 10 फीसद है। इस ब्लॉक में निको की हिस्सेदारी की बिक्री के लिए संभावित बोलीदाताओं की राह में तीनों कंपनियों पर लगा 1.55 अरब डॉलर (लगभग 10,385 करोड़ रुपये) का जुर्माना बड़ी अड़चन साबित हो सकता है। यह जुर्माना बगल में स्थित ओएनजीसी की फील्ड से गैस निकाल लेने के लिए लगाया गया है
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