गोपालगंज, संवाददाता आज महापर्व छठ की पूरे जिले में धूम रही । पूरे जिले में छठ घाटों की साफ - सफाई, रंग - रोगन तथा पूजा के तैयारियों में सभी लोग व्यस्थ देखे गए। गांव - गांव तथा सभी षहरों में लोगों तथा ओरतों को आज छठ घाट जाने तथा वहां पूजन की सामानों की तैयारी में मषगुल देखा गया । षाम होते ही औरतों की टोली तथा लंबी कतारे छठ घाटों पर जाने की लग गई । कई जगह जाम की स्थिति बन गई । हथुआ में ऐसी जाम की स्थिति बनी की प्रषासन को वहां भारी मषक्कत करना पड़ा । दूसरी तरफ बथुआ बाजार में से आगे छठ घाट पर उमड़ी भीड़ ने रास्ता जाम कर दिया । ठीक यही स्थिति मीरगंज तथा गोपालगंज में भी देखने को मिला ।
आज सवनहां गांव में छठ पूजन के लिए गांव के पष्चिम के पोखरा पर भी इसी तरह भारी भीड़ देखा गया । औरत - मर्द तथा बच्चें घाटों पर चारों तरफ फैले हुए थे । बच्चें पटाखे छोड़ने में लगे हुए थे । इस संदर्भ वहां के संतोष तिवारी ने बताया कि इस घाट पर पूर्वजों के समय से छठ पूजन किया जाता है । यहां जो भी छठ मईयां की पूजा करता तथा जो मंगत मांगता है उसे छठ माता कभी निराष नहीं करती । यहां दूसरे षहरों में जाकर नोकरी करने वाले युवा व वुजुर्ग सभी इस पर्व को मनाने तथा पूजने के लिए इस समय गांव आ जाते हैं । उनका कहना है कि हमारे गांव में छठ का बहुत महत्व है । लोग इसकी तैयारी करीब 20 दिन पहले से ही करने में लग जाते हैं । सभी पूरी श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाते है । उन्हांेने बताया कि आप इसके अगल - बगल के गांवों जैसे पेनुला मिश्र, लकड़ी, कंठी, चमारीपट्टी तथा बैजलहां के अलावा सभी गांवों में देख सकते हैं कि यह पर्व धूम - धाम से मनाया जाता है । आज तक सभी पर्व पर किसी न किसी कारण से कोई न कोई विवाद जरूर हो जाता है लेकिन
यह पर्व पूरे बिहार में आज तक कोई विवाद का कारण नहीं बना है ।
लोगों में इस पर्व की उत्सुकता खास देखने को मिला । छठ घाट से औरतें सूर्यास्त के समय अपने हाथों में छिपा और सिंदुर की डिबिया लेकर अपने घर वापस आती है । वहां जो चंगेला पूजा के सामान से भरा हुआ जाता है उसे परिवार का कोइ्र भी सदस्य उठा कर अपने सर पर रख कर घर लाता है । उसके बाद औरते अपने - अपने धरों में कोषी भरने का काम करती है जिसमें धर के बड़े सदस्य तथा उनके बच्चों द्वारा चंदनी टांगने का काम किया जाता है । इस मौके पर एक - दूसरे घर की लड़कियां व औरते एक - दूसरे के घर जाती है और वहां छठ मईया कि गीत गाती है । यह त्यौहार आपसी प्रेम - मुहब्बत का त्योहार कहलाता है ।




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