''सूर्य नगरी'' जोधपुर में पर्यटकों के लिए हैं कई आकर्षण 'Sun City' many attractions for tourists in Jodhpur



जोधपुर, जिसे थार रेगिस्तान का द्वार कहा जाता है, राजस्थान प्रदेश का दूसरा बड़ा शहर है। यह करीब पांच शताब्दियों तक मारवाड़ की राजधानी रहा है। ऐतिहासिक रूप से इसकी यह विशेषता रही है कि इसी रास्ते से बहुमूल्य कपड़ों के व्यापारी अपनी गाड़ियां भरकर गुजरात बंदरगाह तक ले जाते थे व मुगलों के कृपापात्र थे। राठौड़ शासकों की भी मुगलों से निकटता थी अततः वे मुगल शक्ति को बढ़ाने के लिए निपुण योद्धाओं की सेवाएं समय-समय पर देते रहते थे।

जोधपुर जिसे 'सूर्य नगरी' के नाम से भी जाना जाता है, पर्यटकों के लिए अपना अलग महत्व रखता है। यहां का मुख्य आकर्षण पन्द्रहवीं शताब्दी में बना 'मेहरानगढ़ किला' है, जिसे देश का अभेद्य दुर्ग होने का गौरव प्राप्त है। करीब 125 मीटर ऊंचाई में पहाड़ी पर बने इस दुर्ग की अजेय प्राचीर पर अपनी दृष्टि डालेंगे तो इसकी शिल्प रचना देखकर दंग रह जायेंगे। किले के अंदर की सुंदर कारीगरी को देखकर आपको सुखद आश्चर्य होगा। यहां के विशाल प्रांगण में चहलकदमी करते हुए आप महल में स्थित अद्भुत वस्तुओं से सजा संग्रहालय भी देख सकते हैं।

यहां पर स्थित 'उम्मेद भवन पैलेस' बड़े-बड़े उद्योगपतियों व फिल्मी सितारों की शादियों के भव्य आयोजनों के लिए अक्सर खबरों में रहता है। यह बेमिसाल इमारत स्थानीय पत्थरों से बनी है व भारतीय-मध्यपूर्व शैली पर आधारित है। इसे बीसवीं शताब्दी में महाराजा उम्मेद सिंह ने प्रजा को अकाल से राहत देने के लिए बनवाया था। महल के एक भाग में जोधपुर के पूर्व राजपरिवार का निवास है जो आम जनता के लिए खुला नहीं है, परन्तु अगर आप यहां का संग्रहालय देखना चाहें तो उस ओर जा सकते हैं। महल का बाकी का हिस्सा हैरिटेज होटल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।
जोधपुर के अन्य पर्यटन स्थलों में मारवाड़ की मूल राजधानी 'मंडोर' है जहां पत्थरों को तराशकर 15 विशालकाय आकर्षक प्रतिमाएं बनाई गई हैं। महामंदिर, जिसका निर्माण 1812 ईसवीं में हुआ था, की सुंदर वास्तु-कला बरबस ही आपके मुंह से 'वाह' निकलवा लेती है। महाराणा जसवंत सिंह की याद में बना जसवंत थड़ा, मेहरानगढ़ किले के पास ही स्थित है। यहां के दर्शनीय स्थलों में कायलाना झील (11 किलोमीटर), बालसमंद झील व बगीचा (5 किलोमीटर), ओसियां (60 किलोमीटर), धवा (45 किलोमीटर), व लूनी किला (40 किलोमीटर) हैं।

जोधपुर भ्रमण के दौरान आप यहां के बाजारों को आनन्द भी ले सकते हैं। सोजती गेट, नई सड़क, घंटाघर, त्रिपोलिया बाजार और पैलेस रोड ऐसी जगहें हैं जहां आपको बंधेज की साडि़यां व दुपट्टे, चमड़े की जूतियां, अर्ध-मूल्यवान रत्न, चांदी के सामान व जेवर, राजस्थानी चित्र विभिन्न धातुओं की छोटी-बड़ी मूर्तियां, लकड़ी पर नक्काशी का काम आदि इतनी विविधता में देखने को मिलेगा कि आप असमंजस में पड़ जायेंगे कि क्या छोड़ें और क्या खरीदें। रसोई-घर के लिए भी यहां की प्रसिद्ध 'लाल मिर्च, खुशबूदार पिसा धनिया, स्थानीय कैर-सांगरी' खरीदना मत भूलिएगा, यह आपके खाने के स्वाद को बढ़ाते हुए, जोधपुर की याद दिलाते रहेंगे।

बाजार में घूमते हुए आप यहां के प्रसिद्ध तीखा-चटपटा, 'मिर्ची-बड़ा', मावा कचौरी, लस्सी, रबड़ी, लड्डू वगैरहा का आनन्द ले सकते हैं।

प्रीटी




Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment