विधायक अमरपाल शर्मा हुए कांग्रेसी MLA amarpal sharma a congress



नई दिल्ली, ( संजय त्रिपाठी )  पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण सोमवार को बसपा से निकाले गए विधायक अमरपाल शर्मा आज कांग्रेस में शामिल हो गए । उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई । 
            पिछले एक साल से विधायक अमरपाल शर्मा का झुकाव भाजपा के तरफ हो गया था । लेकिन जब बसपा के वरिष्ठ नेता बृजेश पाठक ने बसपा का दामन छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया तब से अमरपाल शर्मा भी भाजपा में जाने के लिए हाथ - पैर मारने लगे । बताया जाता है कि पाठक से उनकी अच्छी धनिष्ठता थी । जब से उत्तर प्रदेश में अन्य पार्टियों के विधायक व नेता भाजपा में शामिल होने लगे थे, तभी से उनकी बेचैनी भी बढ़ गई थी । वे अपने टिकट की सुरक्षा के लिए अंतिम समय तक भाजपा से अपनी जुगाड़ भीड़ाने में लगे रहे । बताया जाता है कि बसपा के गाजियाबाद जिला अध्यक्ष प्रेमचंद भारती के पास दो दिन पूर्व एक व्हाट्स अप पर फोटो आया था जिसमें विधायक अमरपाल शर्मा एक भाजपा के राष्ट्रीय नेता से अपनी टिकट निश्चित करने की बात कर रहे थे । दूसरी तरफ स्थानीय बसपा के कार्यकर्ता विधायक के व्यवहार से खिन्न भी नजर आ रहे थे । जिलाअध्यक्ष ने इस मामले में पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से बात करने के बाद पार्टी सुप्रीमों को इसकी सुचना पहुंचाई । जब पार्टी सुप्रीमों के तरफ से हरी झंण्ड़ी मिली तब जिलाध्यक्ष प्रेमचंद भारती ने उन्हें कल पार्टी से निकाले जाने की घोषणा कर दी । उधर बसपा से निकाले जाने के बाद हर स्तर पर कल भाजपा से टिकट पाने का प्रयास करने में लगे रहे विधायक अमरपाल शर्मा ने टिकट की सूची जारी होने के बाद भी देर रात तक उम्मीद के सहारे भाजपा मुख्यालय में डटे रहे । लेकिन उन्हें अंदेशा हो गया कि भाजपा के तरफ से उन्हें टिकट नहीं मिल सकता , अगर मिलेगी भी तो नोएड़ा से मिल सकती है । क्योंकि कल जब टिकट वितरण के लिए भाजपा की मींटिंग चल रही थी, उसमें साहिबाबाद सीट पर निर्णय नहीं हो पा रहा था । एक लाॅबी अमरपाल शर्मा की भी सिफारिश कर रही थी, तो दूसरी गुट केंद्रीय गृहमंत्री के पुत्र पंकज सिंह के टिकट को लेकर अड़ी हुई थी । हालांकि वहां सुनील शर्मा की पैरवी भी जोड़दार थी । इसी बीच राजनाथ सिंह बैठक छोड़ कर बीच में ही कुछ बोले बिना चले गए । इसका मायने अलग लगाया गया और इस सीट को होल्ड कर दिया गया । अंत में अमरपाल शर्मा गुट को भी निराशा हाथ लगी । अमरपाल रात में ही टिकट पाने की अपनी रणनीति को बदलते हुए कांग्रेस के राष्टीªय सचिव व पश्चिमि उत्तर प्रदेश प्रभारी नसीब सिंह से संपर्क साधा । 
          अमरपाल शर्मा ने पहले अपने समर्थकों की एक मीटिंग की और उसमें बसपा के नसिमुद्दीन सिद्दकी द्वारा टिकट के लिए 5 करोड़ रूपए मांगे जाने की आरोप लगाई । इसके बाद दिल्ली जाकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया । कांग्रेस का हाथ थामने के पीछे भी उनकी मंशा टिकट पाने की ही है । क्योंकि कल शाम ही प्रेस के संबोधन में सपा के रामगोपाल यादव ने कांग्रेस से गठबंधन के संकेत दे दिए थे । गठबंधन के बाद भाजपा को इस सीट पर कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद मानी जा रही है । अब देखना यह है कि साहिबाबाद सीट गठबंधन के बाद कांग्रेस के पास रहती है या सपा के खाते में जाती है । जानकारों का कहना है कि साहिबाबाद, गाजियाबाद और लोनी सीट कांग्रेस के पास ही रहेगी, इस स्थिति में साहिबाबाद और लोनी दोनों सीट उनके लिए फायदेमंद होगी ।  




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