श्री प्रकाश जावडेकर ने कहा ‘पढ़ना ही ज़िंदगी है’ Mr Prakash Javadekar said, "Reading is life '



नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में 
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) ‘पढ़ना हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग है’ ये शब्द माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, श्री प्रकाश जावेडकर ने ‘पठन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण: डिजिटल युग में चुनौतियाँ’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में कहे। श्री जावडेकर ने कहा कि स्कूली बच्चों को पाठ्य-पुस्तकों के अलावा भी पुस्तकें पढ़नी चाहिए। पुस्तकें पढ़ने से ही इन्सान के व्यक्तित्व का विकास होता है।
इस अवसर पर श्री जावडेकर ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित ‘मानुषी’ थीम पर आधारित कैलेंडर-2017 तथा एनबीटी की पुस्तकों, यथा-‘ओड़िया महिला कथाकारों का संकलन’, ’संस्कृत आलोचना की भूमिका’ व ‘तिरूक्कुरल जीवन पथ’ का विमोचन किया।

कैलेंडर का विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि कैलेंडर भारत की प्रमुख विदुषियों की समृद्ध लेखन परंपरा को प्रस्तुत करता है । इस कैलेंडर में गार्गी से लेकर बहिणाबाई तक के व्यक्ति-चित्रों को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं का साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, एनबीटी द्वारा प्रकाशित यह कैलेंडर महिला सम्मान एवं प्रतिभा का गौरव है।
माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में पठन संस्कृति के प्रोन्नयन हेतु प्रारम्भ किए गए ‘वांचे गुजरात कार्यक्रम’ के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसी कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए ‘पढ़ोगे तो बढ़ोगे’ व ’पढ़े भारत, बढ़े भारत’ 
कार्यक्रमों को बहुत तेज़ी से आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकों की दुनिया एक श्रेष्ठ दुनिया है, यह ज्ञान का सागर है। 

उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष हर स्कूल, काॅलेज, यूनिवर्सिटी, शैक्षिक-संस्थानों में मेले का और अधिक प्रचार किया जाएगा जिससे सभी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।
पठन संस्कृति के प्रोन्नयन की इस अक्षर-यात्रा में मोबाइल वैन व रीडर्स-क्लब के
माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें दिव्यांगों के लिए पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त भी ब्रेल लिपि में पुस्तकें लाने का प्रयास करना चाहिए व साथ ही, पुस्तकों को और अधिक रोचक बनाने के लिए इन्हें आॅडियो बुक्स के रूप में भी लाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर यह भी कहा कि भारत सरकार के अधीन आने वाले विभिन्न संगठनों जैसे प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय; साहित्य अकादेमी, संस्कृति मंत्रालय तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा एक साथ मिलकर काम करने तथा अपनी गतिविधियों में तालमेल को सुनिश्चित करने की बेहद आवश्यकता है और पर्याप्त संभावना भी है।
श्री जावडेकर ने श्री तरुण विजय एवं शाम्भवी द्वारा लिखित पुस्तक ‘साइबर पाठशाला’ तथा माननीय सांसद, लोकसभा, प्रो. डाॅ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी द्वारा लिखित पुस्तक ‘रिफ्लेक्शंस आॅफ द सुप्रीम’ का भी लोकार्पण किया। पुस्तक ‘साइबर पाठशाला’ ने नए शब्दों, जैसे ‘सी’ से कैशलेस, ‘डी’ से डीमोनेटाइज़ेशन तथा ‘एच’ से हैकर जैसे शब्द से परिचय करवाया।
इस अवसर पर जानेमाने विद्वान, श्री सुभाष कश्यप भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि एनबीटी के 60 वर्षों के जीवन में मैं लंबे समय से किसी न किसी रूप में जुड़ा रहा हूँ और मुझे एनबीटी का सान्निध्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि एनबीटी द्वारा प्रकाशित उनकी पहली पुस्तक ‘हमारा संविधान’ का लोकार्पण सन् 1979 में ब्रिटिश हाउस आॅफ काॅमंस में स्पीकर महोदय द्वारा किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि एनबीटी ने
परमावश्यक ज्ञान को गाँव-गाँव, शहर-शहर तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
इस अवसर पर विशेष कार्य अधिकारी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, श्री के.के. शर्मा भी उपस्थित थे।




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