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| संजय त्रिपाठी |
पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा और मणिपुर के विधानसभाओं के चुनाव नतीजों ने भाजपा के कद को जहां बढ़ाया है वहीं 2019 के आम चुनाव की इबारत भी लिख दी है । चार राज्यों में सरकार बनाने जा रही भाजपा लोगों के दिल और दिमाग दोनों में रस - बस सी गई है । उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों से लेकर विशेषज्ञों तक सभी को हैरान कर दिया है । दूसरे पार्टियों के नेताओं को हैरान होना तो अलग बात है, खुद प्रधानमंत्री मोदी भी इस फैसला से हैरान है । सभी चैनल और सर्वे करने वाले चारों खाने चीत हैं । सभी का मानना था कि भाजपा का सपा-कांग्रेस और बसपा के साथ टक्कर के कारण पूर्ण बहुमत किसी को नहीं मिल रहा था । हालांकि कुछ सर्वे में भाजपा को बहुमत मिलता तो दिखाया गया है, लेकिन इस अप्रत्याशित जीत की कल्पना किसी ने भी नहीं की थी । इस जीत से प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की ताकत भी बढ़ी है । दिल्ली ओर बिहार विधानसभा चुनाव में हार के कारण कार्यकर्ताओं का जो मनोबल डगमगाया था, वह एक बार फिर वापस आ गया है । उत्तर प्रदेश और बिहार से ही दिल्ली का मार्ग प्रसस्त होता है । बिहार में हार के बाद भाजपा केा एक झटका तो लगा था, लेकिन उसे उम्मीद थी कि इसका कसर उत्त्र प्रदेश से ही पूरा हो सकता है । इस लिए स्वंय प्रधानमंत्री मोदी ने अन्य राज्यों को छोड़कर सारी ताकत यूपी में लगा दिए थे । लगातार तीन दिन बनारस में रहने के पीछे उनका यही उदेश्य था । यूपी के नतीजे ने जाति, धर्म, समुदाय आदि तमाम समीकरणों पर सवालिया निशान लगाते हुए यह दर्शने में सफल हुआ है कि अब मतदाताओं का मन बदल रहा है । यह एक अच्छे लोकतंत्र का संकेत है ।
पंजाब ओर उत्तराखंण्ड के नतीजे पहले से ही लोगों को पता था । दोनों जगह सत्ता विरोधी लहर ने अहम भूमिका निभायी । पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन सरकार से वहां लोगों में नराजगी थी । आम आदमी पार्टी के मैदान में आने से ऐसा लग रहा था कि पंजाब में यह एक नया विकल्प के रूप में उभरेगी, लेकिन लोगों ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया । उत्तराखंण्ड में हरीश रावत से लोगों में असंतोष थी। पहले से ही यहां भाजपा की सरकार की उम्मीद बन गई थी । गोवा और मणिपुर में भाजपा और कांग्रेस में टक्कर थी । हालांकि गोवा में आम आदमी पार्टी और भाजपा से अलग हुए कुछ नेता मैदान में थे, लेकिन वहां के मतदाताओं ने कांग्रेस ओर भाजपा पर ही दाव लगाया । इस चुनावी नतीजे ने एक बार फिर लोगों को राष्ट्रीय पार्टियों के तरफ अग्रसर होता दिखाया है । क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के वजाय लोगों ने बड़ी और राष्ट्रीय पार्टियों पर भरोसा जताया है । कांग्रेस को भी इस चुनाव में संजीवनी मिली है, क्योंकि जिस कांग्रेस में लोगों को दम नजर नहीं आ रहा था उसने भी पंजाब, गोवा और मणिपुर में अपना स्थान बनाया है ।
वास्तविक में उत्तर प्रदेश का चुनाव चुनावी विश्लषकों के लिए शोध का विषय बन गया है । इस राज्य में क्षेत्रीय पार्टियां क्षत्रप बनी हुई थी, जिसे भाजपा ने एक ऐतिहासिक जीत से धाराशाही कर दिया है । आगे क्षेत्रीय पार्टियां जो जाति, धर्म और समुदाय के नाम पर राजनीति करती रही है, उनके लिए अब मंथन का समय है । नोटबंदी को लेकर अन्य पार्टियों को जो उम्मीद थी कि आम जनता को नोटबंदी के दौरान हुई परेशानी को लेकर मोदी को घेरा जायेगा, यह मुद्दा भी इस चुनाव में चारों खाने चीत नजर आया । यानी जनता तमाम परेशानियों के वजाय मादी के जादूई व्यक्तित्व को देखने के लिए ज्यादा उत्सुक है । अब भाजपा के लिए 2019 के आम चुनाव का रास्ता आसान तो हो गया है, लेकिन इसी तरह अप्रत्याशित जीत सबसे ज्यादा उसके कार्य और व्यवहार पर निर्भर है ।
संजय त्रिपाठी




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